पहले चरण में ली गई पांच फीसदी जमीन का भुगतान होना भी बाकी है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक प्रशांत दुबे ने बताया कि भूमि अध्याप्ति अधिकारी के स्तर से अवॉर्ड घोषित होने के बाद मुआवजा जारी होता है।
कई बार अंश निर्धारण न होने और दूसरी कागजी प्रक्रिया अपूर्ण होने पर मुआवजे अटक जाते हैं। अगर किसी का भुगतान अटका है तो वे जानकारी उपलब्ध कराएं। जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर से कार्रवाई होगी।
घपलेबाजों को हाथों हाथ दिया मुआवजा
घपलेबाजों को हाथोंहाथ मुआवजे दिए गए। एनएचएआई मुख्यालय दिल्ली से आई टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में लिखा है कि सर्वे नंबर 145 व 146 के भूमि मालिक ने अधिसूचना से मात्र 31 दिन पहले जमीन खरीदी थी।
तत्कालीन भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने अवॉर्ड किया था। विशेष रूचि लेकर कुछ ही दिन में मुआवजा भी दे दिया गया। तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी ने 15-30 दिन में बिना किसी आपत्ति के भुगतान अनुमोदित किए, जबकि सामान्य प्रक्रिया में इसके लिए दो से चार महीने लग रहे थे।
टूट गया मकान, पर नहीं मिला मुआवजा
हमारे सभी पड़ोसियों को मुआवजा मिल चुका है। मेरा मकान भी टूट गया, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। कई बार कागज जमा हो चुके हैं। - सुरेंद्र कौर, तिगरा
मेरा प्लॉट हाईवे की जद में नहीं था। बाद में पता लगा कि उस पर सर्विस रोड बनेगी। 80 मीटर जमीन चली गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला है। - धर्मेंद्र सिंह, पूर्व सभासद, रिठौरा
दो साल पहले बताया गया था कि मकान हाईवे की जद में है। सर्वे हो गया, पर मुआवजा नहीं मिला। अब एलएलएओ और एनएचएआई दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं। - कमलेश, रिठौरा
मेरा प्लॉट भी हाईवे की जद में आ गया है, लेकिन मुआवजा नहीं मिला है। लेखपाल का कहना है कि जमीन का अंश निर्धारण नहीं हुआ है। - चंपा देवी, रिठौरा
सीडीओ की रिपोर्ट से तैयार किया जा रहा आरोपपत्र
भू अधिग्रहण घोटाले में निलंबित किए गए लोक निर्माण विभाग के चार अभियंताओं और एक अमीन के खिलाफ मुख्य विकास अधिकारी की 227 पन्नों की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपपत्र तैयार हो रहा है।
विभागीय स्तर पर घोटाले को लेकर कोई जांच नहीं कराई गई है। मुख्य अभियंता ने सीडीओ की जांच रिपोर्ट मंगाई है। उसी के आधार पर ही आरोपपत्र तैयार करा रहे हैं। आरोपपत्र चारों निलंबित अभियंताओं एई स्नेहलता श्रीवास्तव, जेई राकेश कुमार, अंकित सक्सेना, सुरेंद्र सिंह व अमीन शिवशंकर को दिया जाएगा। इसकी प्रति शासन को अगली कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी, क्योंकि जेई और एई की नियुक्त शासन स्तर से होती है।