चाहकर भी कुछ नहीं बोल पा रहे नेता
स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर में करीब छह सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। कुछेक को छोड़ दें तो अधिकतर प्रोजेक्ट अभी शुरू नहीं हो सके हैं। चूंकि, परियोजना खुद सरकार की तरफ से बनाई गई है, इसलिए सत्ता पक्ष के नेता सब कुछ जानते हुए भी इस पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
हालांकि, महापौर उमेश गौतम जरूर पिछले दिनों मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत कर आए कि स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टों को शुरू नहीं कराया जा रहा। दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी के अफसर इस बारे में कुछ बोलना ही नहीं चाहते।
यह है स्काई वॉक बनाने का मकसद
स्मार्ट सिटी के अफसरों की मानें तो स्काई वॉक बनाने का मकसद यह है कि यहां लोग शाॅपिंग कर सकें। चाट-पकौड़ी का स्वाद ले सकें। इसके लिए यहां दुकानें बनाई जाएंगी। दुकानों को किराये पर दिया जाएगा, जिससे स्काई वॉक की लागत निकलेगी।
नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि स्काई वॉक समेत गांधी उद्यान, फूड कोर्ट, मल्टीलेवल पार्किंग के टेंडर हो गए हैं। जल्द इनका संचालन शुरू हो जाएगा। मेरे आने से पहले स्काई वॉक की डिजाइन तय हो गई थी और काम भी शुरू हो गया था। तब स्काई वॉक के डिजाइन में पारदर्शिता क्यों नहीं रखी गई? उस समय तैनात रहे अधिकारी ही यह बता सकेंगे।