बरेली। रबर फैक्टरी की जमीन पर राज्य सरकार की पुनर्प्रवेश याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले जिला प्रशासन तैयारी में जुट गया है। रविवार को छुट्टी के दिन जमीन के अधिग्रहण के पुराने दस्तावेजों की तलाश करने के लिए अधिकारियों की मौजूदगी में दिन भर रिकॉर्ड रूम खंगाला गया।
रबर फैक्टरी घाटे और कर्ज में डूबने के बाद 23 साल पहले बंद हो गई थी। ढाई साल से बॉम्बे हाईकोर्ट में रबर फैक्टरी की जमीन पर मालिकाना हक तय करने का केस लंबित है। लंबे समय बाद इस पर 24 अगस्त को सुनवाई हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार का पक्ष सुनने के लिए 14 सितंबर की तारीख दी थी। माना जा रहा है कि 14 सितंबर की सुनवाई के बाद कोर्ट फैसला सुना सकता है। लिहाजा जिला प्रशासन कोर्ट में प्रदेश सरकार का मजबूती से पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है। इसी कारण जरूरी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट में महाराष्ट्र के महाधिवक्ता अनिल सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पक्ष रखा था। इस बार उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता अजय प्रकाश मिश्र पक्ष रख सकते हैं। इस दौरान हाईकोर्ट में जिला प्रशासन की ओर से एडीएम एफआर संतोष बहादुर सिंह, संयुक्त आयुक्त उद्योग ऋषि रंजन गोयल, कोर्ट रिसीवर एनवी ठक्कर, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश दुबे पाटिल समेत वकीलों का पैनल मौजूद रहेगा। जिला प्रशासन की टीम 13 सितंबर को मुंबई पहुंच जाएगी।
अपने हक के लिए एकजुट हों कर्मचारी
एस एंड सी कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक मिश्रा के मुताबिक कर्मचारियों की देनदारी का रिकॉर्ड तैयार कर लिया गया है। लगभग सभी कर्मचारियों के वेतन की रसीद और ड्यूज के प्रपत्र प्राप्त हो गए हैं। कुछ लोगों के प्रपत्र श्रम विभाग के सहयोग से निकाले जा रहे हैं ताकि उनके परिजन को भी मदद मिल सके। उन्होंने सवेतन अवकाश पर चल रहे कर्मचारियों से अपना हक पाने के लिए एकजुटता की अपील की है।
सेठ किलाचंद इंटर कॉलेज को सैनिक स्कूल में तब्दील करने की भी योजना
रबर फैक्टरी परिसर स्थित सेठ किलाचंद तुलसीदार इंटर कॉलेज को सैनिक स्कूल की तर्ज पर विकसित करने की कवायद में जिला प्रशासन जुट गया है। एडीएम एफआर संतोष बहादुर के मुताबिक सेठ किलाचंद ने प्रदेश सरकार से अधिग्रहीत जमीन पर इस कॉलेज को शुरू कराया था। शुरुआत में इसमें फैक्टरी कर्मचारियों समेत आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ते थे। कॉलेज में अब भी कक्षाएं चल रही हैं। भवन भी सही सलामत है। कॉलेज के निर्माण के लिए दी गई जमीन के भी दस्तावेज खोजे जा रहे हैं। हक में फैसला आया तो इसे सैनिक स्कूल बनाया जा सकता है।