बरेली। निर्माण कार्यों और सड़कों से उठ रही धूल से शहरी हांफ रहे हैं। फेफड़ों में धूल के कण भरने से लोगों की सांसें फूल रही हैं। जो पहले से सांस रोगी हैं, उनकी हालत खराब हो रही है। जो लोग हेलमेट व चश्मे के बिना बाइक पर निकल रहे हैं, उनको भी यह धूल काफी परेशान कर रही है। लोगों की आंखें लाल हो रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
चेस्ट फिजिशियन डॉ. पुनीत अग्रवाल के मुताबिक दिन में तेज धूप के साथ धूल उड़ रही है। फसलों की कटाई-मड़ाई की वजह से हवा के साथ सूक्ष्म कण भी सांस के जरिये फेफड़ाें में पहुंच रहे हैं। ये कण श्वास नलिकाओं में जमा होकर उत्तकों को क्षतिग्रस्त करने लगते हैं जो एलर्जी का प्रमुख कारक है। ऐसे मौसम में जो लोग बुखार, खांसी की चपेट में आ रहे हैं, वे जल्द स्वस्थ नहीं हो रहे। खांसने से फेफड़ों पर जोर पड़ता है। वे भरपूर ऑक्सीजन अवशोषित नहीं कर पाते। लिहाजा, रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है।
दिन में एक्यूआई 150 के पार, नमी 44 फीसदी
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक दोपहर में नमी 44 फीसदी दर्ज हो रही है। इससे शरीर में निर्जलीकरण की आशंका रहती है। साथ ही धूल के कण हल्के होकर हवा में घुल जाते हैं। यही वजह है कि दोपहर 12 से तीन बजे के बीच एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 150 के पार पहुंच रहा है।
घर्र-घर्र की आवाज आए तो हो जाएं सतर्क
डॉक्टरों के मुताबिक धूल के कण चिपकने से श्वांस नलिकाएं संकरी होती हैं। ऐसे में रात में सोने के दौरान घर्र-घर्र की आवाज आती है। ऐसी स्थिति होने पर सतर्क हो जाएं और इलाज शुरू करा दें। अन्यथा तबीयत और बिगड़ सकती है। संक्रमित व्यक्ति के करीबियों के भी चपेट में आने की आशंका रहती है।
ओपीडी में हर दिन पहुंच रहे 70 सांस रोगी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, टीबी व अन्य रोगों की चपेट में आ रहे लोग परामर्श के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। रोजाना ऐसे 70 रोगियों को दवाएं जारी रखने, घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाने, गुनगुने पानी का सेवन करने का सुझाव दिया जा रहा है।
बुखार में कम हो रहा रक्तचाप, आ रहे चक्कर
डॉ. बाजपेई के मुताबिक अबकी बार अचानक तापमान बढ़ने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई है। ओपीडी में बुखार के मरीजों की जांच में रक्तचाप भी कम मिल रहा है। इससे सिर चकराने की भी समस्या आ रही हैं। गर्मी की वजह से उल्टी और पेट दर्द के मरीज भी बढ़े हैं।