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फाॅल्ट लोकेटर धमाका : अब तय होगी जवाबदेही

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बरेली। फॉल्ट लोकेटर के डेमो के दौरान धमाका होने के बाद शुरू हुई जांच की आंच अभियंताओं पर आ सकती है। पहले से यदि रिहर्सल कर लिया गया होता तो शायद इस तरह का जोखिम नहीं रहता। डेमो के दौरान न तो विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम बुलाई गई थी, न ही सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए थे। जिन अभियंताओं की जिम्मेदारी थी, वे अतिथि की तरह पहुंचे। अब प्रशासन की जांच में उनकी जवाबदेही तय होगी।
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रामपुर बाग के 33 केवी उपकेंद्र के यार्ड में 20 मार्च को राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल सहित अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में फाॅल्ट लोकेटर का डेमो कराया गया था। इस दौरान धमाका होने पर डेमो की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों हुई, जांच में इसका जवाब तलाशा जा रहा है। मंडलायुक्त के आदेश पर जांच कर रहे एडीएम डॉ. आरडी पांडेय ने बताया कि दो दिनों में साक्ष्य मांगे गए थे। जेई, एई तथा तीन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए गए हैं। जल्द ही रिपोर्ट डीएम के जरिये मंडलायुक्त को सौंप दी जाएगी।



नहीं शुरू हो सकी विभागीय जांचचीफ इंजीनियर की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी की चार दिनों में बैठक ही नहीं हो सकी, जबकि सात दिनों में रिपोर्ट देनी है। कमेटी में पीलीभीत के एसई एसके मधुकर, बरेली ग्रामीण क्षेत्र के एसई अशोक कुमार चौरसिया और एक्सईएन परीक्षण केके राठौर शामिल हैं। दो दिन एसई बाहर थे। अब एक्सईएन की सेहत ठीक नहीं है। ब्यूरो
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इन सवालों के जवाब जरूरी
- जब विकास भवन के निकट डेमो कराया जाना था तो किसके कहने पर सब स्टेशन के यार्ड में कराया गया।
- विद्युत सुरक्षा निदेशालाय की टीम क्यों नहीं बुलाई गई। - जब कार्यक्रम में वीआईपी को बुलाया जाना था तो पहले से रिहर्सल कर फाॅल्ट लोकेटर को चेक क्यों नहीं किया गया।
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