बरेली। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट बनकर पूरे गांव को बचत की राह दिखा रही हैं। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवसाय को नया आयाम दे रही हैं। लोगों की छोटी रकम को जमा कराकर उन्हें बचत के लिए प्रेरित कर रही हैं। जरूरत पर उनको ऋण मुहैया कराकर सहयोग कर रही हैं। ये महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। आज के विशेष अंक में हम ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी साझा कर रहे हैं।
फर्ज निभा रहीं फरजाना
भोजीपुरा के भैरपुरा खजुरिया गांव की फरजाना ने गांव के दो हजार लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच आसान बनाई है। शादी के बाद भी कॅरिअर संवारने की ललक में आज से डेढ़ साल पहले उन्होंने बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट बनकर यह सफर शुरू किया। गांव की महिलाओं को बचत का महत्व समझाकर प्रेरणा दी।
गांव में ही बनाया कॅरिअर
भोजीपुरा के चौपारा गांव की नैंसी प्रजापति ने एमएससी करने के बाद बाहर जाने के बजाय गांव में ही रहकर गांव के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। वह बताती हैं दादा-दादी को उनका गांव छोड़ना जरा भी अच्छा नहीं लगता था। इसलिए वह गांव में ही बतौर बीसी सखी काम कर रही हैं। सैकड़ों लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।
डेढ़ हजार परिवारों की सलाहकार
शेरगढ़ की शारदा भी बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हैं। तीन साल से बैंकिंग व्यवसाय से जुड़कर वह यह काम कर रही हैं। शादी के बाद परिवार को मदद करने के लिए कुछ करने की चाह में काम से जुड़ीं शारदा आज डेढ़ हजार से अधिक परिवारों के लिए आर्थिक सलाहकार की भूमिका निभा रही हैं। गांव के लोगों का भी सहयोग मिलता है।
स्वाति ने भी बनाई पहचान
बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट स्वाति भी ग्रामीण क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाओं को बढ़ावा देकर अपनी पहचान बना चुकी हैं। फरीदपुर में डेढ़ साल पहले उन्होंने यह काम शुरू किया और काफी प्रयासों से सफलता हासिल की। गांव की महिलाएं दूर होने की वजह से बैंक नहीं जाती थीं। उन्होंने ऐसी महिलाओं को बचत के लिए प्रेरित किया है।