लखीमपुर खीरी। आज संसाधनों की कमी की वजह से राजकीय विद्यालयों की साख पर बट्टा लग रहा है। जिले में 51 राजकीय विद्यालय हैं। शिक्षकों का अभाव तो हर कहीं हैं। कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां बच्चों के छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं हैं। कई भवन खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं।
शहर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 1300 छात्राएं पंजीकृत हैं। इनके बैठने के लिए न तो पर्याप्त भवन है और न ही शिक्षक हैं। छात्राएं बरामदे में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं। प्रधानाचार्य डॉ. शालिनी दुबे ने बताया कि छात्राओं को पढ़ाने के लिए पीटीए (अभिभावक शिक्षक संघ) से शिक्षक रखे गए हैं।
ऐसी ही हालत राजकीय इंटर कॉलेज की है। कॉलेज में 750 छात्र पंजीकृत हैं। इनको पढ़ाने के लिए सिर्फ 15 शिक्षक तैनात हैं। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों की कमी कई साल से है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए पीटीए से शिक्षक रखे गए हैं। वहीं स्वीकृत पद के सापेक्ष रिक्त पदों के संबंध में शासन को समय समय पर सूचना भेजी जाती है।
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जीजीआईसी में बढ़ी तो जीआईसी में घट गई छात्र संख्या
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में छात्राओं की संख्या बढ़ी है तो वहीं जीआईसी में छात्रों की संख्या घट गई है। जीजीआईसी में 1300 छात्राओं का पंजीकरण है। इनकी संख्या बढ़ने का कारण खेल प्रतियोगिताएं एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण को लेकर निरंतर होने वाले कार्यक्रम हैं। जीआईसी में आज से दस साल पहले जहां प्रवेश के लिए मारामारी मचती थी तो वहीं आज मात्र 750 छात्र पंजीकृत हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को जीआईसी की बजाय निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाना प्राथमिकता दे रहे हैं।
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जर्जर भवन हादसे को दे रहा दावत
जीजीआईसी का सौ साल पुराना भवन निष्प्रयोज्य घोषित हो चुका है। इसे गिराने की कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में यह भवन कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है क्योंकि लंच के दौरान अधिकतर छात्राएं और शिक्षिकाएं इसमें बैठती हैं। प्रधानाचार्य बताती हैं कि इस बिल्डिंग को गिराने के लिए कई बार लिखा-पढ़ी की। हुआ कुछ नहीं।
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छात्रों को नहीं मिल पा रही खेल मैदान की सुविधा
राजकीय इंटर कॉलेज में काफी बड़ा खेल मैदान है। पर यह बच्चों के खेलने के बजाय राजनीतिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन के काम आता है। इस पर चुनाव के दौरान रैलियां एवं दिवाली पर पटाखे की दुकानें सजती हैं। विभागीय लोग बताते हैं कि मैदान तो कॉलेज का है। मगर इसकी बुकिंग के लिए लोग प्रशासन से संपर्क करते है। इस पर सिर्फ प्रशासन एनओसी मांगता है। इसके बाद अधिकारी रैली से लेकर अन्य कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति दे देते हैं। इसकी वजह से मैदान भी दुरुस्त नहीं है।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज
विद्यार्थी संख्या-1300
पद स्वीकृत तैनाती रिक्त
प्रधानाचार्य एक 00 00
प्रवक्ता 13 आठ पांच
एलटी ग्रेड 20 12 आठ
बीटीसी नौ एक आठ
चतुर्थ श्रेणी 15 छह नौ
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राजकीय इंटर कॉलेज में पंजीकृत संख्या-750
प्रवक्ता 16 तीन 13
एलटी ग्रेड 25 12 13
चतुर्थ श्रेेणी 11 चार सात
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धौरहरा : बैठने के लिए बोरी लेकर आती हैं छात्राएं
धौरहरा। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 811 छात्राओं को पढ़ाने के लिए चार नियमित और पांच शिक्षिकाओं को पीटीए से रखा गया है। शिक्षिका निधि वर्मा प्रभारी प्रधानाचार्य हैं। कॉलेज में स्वीकृत पद के सापेक्ष न तो शिक्षिकाएं हैं और न ही छात्राओं के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर। छात्राएं अपनी बोरी लाकर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में छात्राओं को सबसे ज्यादा दिक्कत सर्दी के मौसम में होती हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय में प्रधानाचार्य के अलावा प्रवक्ता के नौ और एलटी ग्रेड के छह शिक्षक कम हैं। ऐसे में छात्राओं को पढ़ाने के लिए पीटीए से शिक्षक रखे गए हैं। संवाद
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भीखमपुर : फर्श पर बैठकर पढ़ते हैं बच्चे, घूमते हैं छुट्टा पशु
भीखमपुर। राजकीय स्कूल में न तो छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं और न ही बैठने के लिए फर्नीचर। आलम यह है कि बाउंड्रीवाल के अभाव में छुट्टा जानवर छात्र-छात्राओं के लिए मुसीबत बनते हैं। प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि विद्यालय में 180 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनको पढ़ाने के लिए सिर्फ पांच शिक्षक तैनात हैं। इसमें गणित, गृहविज्ञान एवं कला विषय के शिक्षक तक नहीं है। फर्नीचर के अभाव में छात्र-छात्राएं ठंड में भी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं।
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मोहम्मदी : दो शिक्षिकाओं पर 117 बच्चों की जिम्मेदारी
मोहम्मदी। राजकीय हाईस्कूल महमदपुर दीना में 2014 से हाईस्कूल की कक्षाएं संचालित हैं। 117 छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। कार्यवाह प्रधानाचार्य नीलम एवं शिक्षिका उत्पल वर्मा पर बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। शिक्षिका उत्पल वर्मा बताती हैं कि सात शिक्षकों का स्टाफ और एक चौकीदार सहित 11 लोगों की तैनाती होनी चाहिए। मगर, सिर्फ हम दो लोग हैं। पीने के पानी के लिए सिर्फ हैंडपंप है।