बरेली। मच्छर व अन्य कीटों से परेशान होने पर अक्सर लोग हानिकारक केमिकल युक्त कीट निरोधक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, जिसके कई बार दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। इसके समाधान के रूप में शिक्षकों के एक समूह ने इको-फ्रेंडली उपकरण डिजाइन किया है, जिसमें पौधे के अर्क से कीटों को दूर भगाया जाता है। इस डिजाइन के पेटेंट को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी कार्यालय ने स्वीकृति देते हुए शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रदान किया है।
वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी राजकीय महिला महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. विकास वर्मा पटेल बताते हैं कि मशीन में हानिकारक रसायन के स्थान पर वाइल्ड मेरीगोल्ड या ट्रेलिंग डेजी (स्पैगनेटिकोला ट्राइलोबाटा) का इस्तेमाल कीटों को दूर भगाने के लिए किया जाता है। इस पौधे में विशेष सुगंध होती है, यह हर जगह आसानी से मिल जाता है।
इससे बाजार में बिकने वाले केमिकल से कीट भगाने वाले उत्पादों को चुनौती मिलने की संभावना है। इन्हें घरों में इस्तेमाल करने पर लोगों को एलर्जी और श्वास लेने की दिक्कतें भी होने लगती है। पेटेंट पंजीकरण उद्योग में सुरक्षित और हरित समाधानों के लिए रास्ता तैयार करेगा। इसे छह अगस्त को पंजीकृत किया गया व 14 अगस्त को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी कार्यालय की ओर से इसका प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
इसे डॉ. विकास व उनके सहयोगी प्रिय लोकरे, डॉ. कुल भास्कर, मेहर अली रुशो, डॉ. अखिलेश शर्मा ने डिजाइन किया है। यह शस्त्र, पटाखे, शिकार, मछली पकड़ने और कीट मारने के उपकरण की श्रेणी में शामिल है।
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पेटेंट को स्वीकृति मिल चुकी है। यह पर्यावरण का ख्याल रखते हुए लोगों को कीटों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कीट निरोधक उपकरण का इस्तेमाल पौधे के अर्क से ही होगा, जोकि सुगंध के साथ सुरक्षा भी देगा।- डॉ. विकास वर्मा पटेल, सहायक प्रोफेसर