बरेली। राजकीय संकेत विद्यालय वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। दो शिक्षकों पर 150 दिव्यांग विद्यार्थियों के शिक्षण की जिम्मेदारी है। जबकि मानक के अनुसार आठ विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। छह माह पहले स्कूल के दौरे पर आए सीडीओ ने विद्यार्थियों को वचन दिया था कि वह दोबारा स्कूल में तभी कदम रखेंगे, जब उनके लिए शिक्षकों का इंतजाम हो जाएगा। इससे पहले भी कई अधिकारियों ने वादे किए, लेकिन किसी ने निभाया नहीं। विद्यालय में उच्च श्रेणी की कक्षाएं, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, डांस रूम सब है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में सभी में ताले पड़े रहते हैैं।
विद्यालय की शिक्षिका डॉ. शिवि अग्रवाल ने बताया कि स्कूल में प्रधानाचार्य के अलावा एक अन्य शिक्षक हैं। प्रधानाचार्य सप्ताह में चार दिन फर्रुखाबाद में ड्यूटी करते हैं। शिक्षक श्रवण कुमार को भी आवश्यक निर्देशों के चलते माह में कुछ दिन बाहर रहना होता है। ऐसे में नौ कक्षाओं के प्रबंधन में काफी दिक्कतें आती हैं। सिलाई कक्ष, ब्यूटीशियन कक्ष, नृत्य कक्ष, कंप्यूटर लैब सहित कौशल विकास के विभिन्न संसाधन ताले में बंद रहते हैं।
सफाई कर्मी मौजूद पर हर ओर धूल की परत
विद्यालय में पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मी मौजूद हैं, लेकिन कोई कोना ऐसा नहीं है जहां धूल की मोटी परत न हो। स्कूल के फर्श और सीढि़यों से लेकर क्लास रूम तक सभी धूल से पटे पड़े हैं।
उत्कृष्ट कक्षाओं का लाभ नहीं ले पा रहे मूक-बधिर छात्र
विद्यालय के हर कक्ष में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था है, जिसमें प्रोजेक्टर से लेकर स्मार्ट टीवी तक संचालन की अवस्था में है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में ये संसाधन केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
शिक्षकों के अभाव में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लेते हैं कक्षाएं
विद्यालय में पढ़ने वाले मूक-बधिर बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को तैनात किया जाता है। इसका कारण यह है कि इन बच्चों को साइन लैंग्वेज की सहायता से ही चीजें समझाई जा सकती हैं। स्कूल में नौ कक्षाएं लगती हैं। शिक्षकों के अभाव में कई कक्षाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विद्यार्थियों को पढ़ाते दिख जाते हैं।
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विद्यालय में शिक्षकों की समस्या साल 2012 से है। बैठकों में शासन से प्रशासन तक मुद्दे को उठाया गया है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। हमने विवश होकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को क्लास की जिम्मेदारी सौंपी है। - डॉ बलवंत सिंह, प्रधानाचार्य