बरेली। डेंगू स्वत: ठीक होने वाली बीमारी है। शरीर में पानी की कमी हो जाए तो उसे ग्लूकोज सेलाइन चढ़ाया जाता है, लेकिन झोलाछाप इस बैलेंस को नहीं पकड़ पाते और दवाएं खिलाकर रोग को बढ़ाते हैं। हालत बिगड़ने पर विशेषज्ञ के पास भेजते हैं। इसलिए डेंगू होने पर विशेषज्ञ को दिखाएं। यह सुझाव शनिवार को आईएमए भवन में आयोजित संगोष्ठी से पूर्व प्रेसवार्ता के दौरान साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. सुदीप सरन ने दिए।
उन्होंने कहा कि डेंगू शाॅक सिंड्रोम की स्थिति तब होती है जब शरीर में प्लेटलेट्स दस हजार के नीचे हों। पैरासिटामॉल के अलावा बगैर चिकित्सकीय परामर्श पर ही अन्य दवा का सेवन किया जाए। बताया कि प्लेटलेटस वायरल बुखार होने पर भी गिरती हैं। इसलिए अधिकृत लैब से जांच जरूरी है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि बुखार, ठंड लगना व अन्य लक्षणों के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, दाने निकलें तो डेंगू हो सकता है।
दिल्ली के न्यूरो सर्जन डॉ. सुधीर त्यागी ने ब्रेन ट्यूमर के आधुनिक इलाज की जानकारी दी। कहा कि पतली बीम विकिरण के जरिए कैंसर सेल को हटाना मुमकिन है। इसमें ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरुण बंसल ने बताया कि अब ओपन हार्ट सर्जरी के बजाय रोबोटिक सर्जरी संभव है। इसमें छोटे से चीरे के जरिए इलाज मुमकिन है। रक्तस्राव कम होता है। ज्यादा दिन निगरानी की जरूरत नहीं होती। यह सर्जरी बुजुर्गों के लिए सटीक है। क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. नमित जेराथ ने डेंगू के शाॅक सिंड्रोम की स्थिति में बचाव के बारे में जानकारी दी। कहा कि समय पर रोग की पहचान हो तो इलाज मुमकिन है। इस दौरान आईएमए सचिव डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. अनूप आर्य समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।