सीबीगंज (बरेली)। बंडिया गांव में खूंखार कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को पेड़ के नीचे खेल रहे सात वर्षीय बालक विष्णु पर कुत्तों ने हमला कर दिया। वह उसे घसीटकर दूर तक ले गए। चीखपुकार पर आसपास के लोगों ने बच्चे को बमुश्किल कुत्तों से छुड़ाया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक सप्ताह में यह तीसरी घटना है।
घटना मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे बंडिया में मंदिर के पास हुई। सात साल का विष्णु प्राथमिक विद्यालय में कक्षा दो का छात्र है। लंच के वक्त वह चला आया था और मंदिर के पास आम के पेड़ के नीचे अपने साथियों के साथ खेलने लगा। जंगल की तरफ से आए खूंखार कुत्तों ने बच्चों पर हमला कर दिया। अन्य बच्चे भाग निकले, जबकि विष्णु को कुत्ते घसीटते हुए दूर खेत में ले गए। चीखपुकार पर आसपास के लोग एकत्र हो गए।उन्होंने बच्चे को कुत्तों से छुड़ाया। जिला अस्पताल में भर्ती विष्णु की हालत गंभीर है। विष्णु के पिता ख्यालीराम की मौत हो चुकी है और मां के साथ रहता है।
0000000000000
पांच दिन में तीसरे बच्चे पर हमला
- पांच दिन में कुत्तों ने तीन बच्चों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से जख्मी कर दिया है। सभी का उपचार चल रहा है। 14 अप्रैल को बंडिया गांव निवासी हना (4 )पुत्री जीशान, 15 अप्रैल को मथुरापुर के सागर (10) पुत्र वेदप्रकाश पर कुत्तों ने हमला बोला था। मंगलवार को विष्णु पर हमला कर दिया। उसके चेहरे पर गहरे घाव हैं। शरीर के अन्य हिस्सों पर भी काटा गया है।
000000
तीन बच्चों की हो चुकी है मौत
- करीब दो साल में ये कुत्ते तीन बच्चों की जान ले चुके हैं। वह करीब 15 बच्चों को काटकर जख्मी कर चुके हैं, लेकिन नगर निगम इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसी साल 15 फरवरी को घर के पास खेल रही मासूम बच्ची परी पर हमला कर कुत्तों ने बुरी तरह नोच डाला था। उसकी मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। एक साल पहले मोरपाल फिर रोहनी नाम के बच्चे कुत्तों के हमले में मारे गए।
0000
फोटो- लोगों के फोटो
कुत्तों को न पकड़ने पर मतदान बहिष्कार की चेतावनी
गांव निवासी नरेश राजपूत, चमन राजपूत, शिवओम शुक्ला का कहना है कि आवारा कुत्तों से गांव में दहशत है। बच्चों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। आए दिन बच्चों पर कुत्ते हमला कर उन्हें जख्मी कर रहे हैं। कई बार नगर निगम में कुत्तों को पकड़ने के लिए लिखित शिकायत की। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई पर कोई नतीजा नहीं निकला। एक बार नगर निगम से टीम आई तो केवल दो कुत्तों को पकड़कर चली गई। लोगों का कहना है कि अगर जल्द कुत्ते नहीं पकड़े गए तो वह नगर निगम चुनाव में मतदान का बहिष्कार करेंगे।