बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर में मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के राज्य पशुपालन विभाग के चिकित्साधिकारियों के लिए इंटरफेस मीट हुई। इसमें वैज्ञानिकों ने पशु स्वास्थ्य और पशुधन उत्पादन में सुधार के प्रति जानकारी दी।
पशु रोग और उत्पादन में अनुसंधान प्रवृत्तियों विषय पर आयोजित कार्यशाला में आईवीआरआई की ओर से तैयार की गई नई प्रौद्योगिकियों समेत अन्य विषयों पर विचार साझा किए गए। हिमाचल प्रदेश पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. संदीप रतन ने संस्थान की पहल को सराहा। संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने आईवीआरआई की एतिहासिकता, उपलब्धि, संचालित पाठ्यक्रम, आईसीटी टूल्स, एआई चैटबोड अन्य जानकारी साझा की। संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने पूर्व की बैठकों के आधार पर पशुओं में ज्यादातर प्रजनन, बांझपन, चयापचय, पोषण संबंधी कमी से होने वाली बीमारियों समेत अन्य जानकारी दी। अध्यक्ष संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह ने की।
पशुपोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. एलसी चौधरी ने पहाड़ों में गुणवत्तापूर्ण चारा उत्पादन के लिए अपरंपरागत चारा संसाधनों के प्रभावी उपयोग, पशु पुनरूत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. एमएच खान ने बांझपन, बार-बार प्रजनन करने वाले प्रजनकों की पहचान, क्षेत्रीय परिसर कोलकाता के डाॅ. एस बंधोपाध्याय ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध के मुद्दे, एथनो-मेडिसिन की भूमिका, डाॅ. देवी गोपीनाथ ने भी विचार साझा किए।
संयुक्त निदेशक, कैडराड डाॅ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डाॅ. एसके मेंदीरत्ता, बंगलूरू परिसर के संयुक्त निदेशक डाॅ. पल्लव चौधरी, मुक्तेश्वर के संयुक्त निदेशक डाॅ. यशपाल मलिक, कोलकाता स्टेशन के प्रभारी डाॅ. अर्णव सेन, पालमपुर केद्र प्रभारी डॉ. गोरखमल, डॉ. यूएस पाती, वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार, डाॅ. अज्यता रियालच, डॉ. रिंकू शर्मा, डॉ. बीरबल, डॉ. गौरी जयरथ आदि मौजूद रहे।