बरेली। ग्यारहवीं शरीफ पर बड़े पीर शेख अब्दुल कादिर बगदादी गौस-ए-पाक की याद में सोमवार को सैलानी के रजा चौक से जुलूस-ए-गौसिया शान-ओ-शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में डीजे और शोरशराबे ने नाराज होकर आला हजरत दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) कयादत (नेतृत्व) छोड़कर चले गए। उन्होंने सिर्फ झंडा सौंपने की रस्म अदा की। इसके बाद आयोजकों ने जैसे-तैसे जुलूस संपन्न कराया।
अंजुमन गौसे रजा की ओर से निकाले गए जुलूस में लगभग 80 अंजुमनों ने रंग-बिरंगी पोशाक में शिरकत की। अंजुमन में शामिल लोग या गौस की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। आयोजक हाजी शारिक नूरी, मुस्तफा नूरी, अफजल उद्दीन, वामिक रजा आदि ने कायदे जुलूस अहसन मियां की दस्तारबंदी कर इस्तकबाल किया। मुफ्ती अहसन मियां ने सैयद हुमायूं अली को गौसिया परचम सौंपकर जुलूस को रवाना किया। सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां उर्फ सुब्हानी मियां की रही।
अहसन मियां ने जुलूस में डीजे लेकर आने वाली अंजुमनों पर सख्त नाराजगी जताई। कहा, आइंदा अगर कोई भी अंजुमन जुलूस में डीजे लेकर आएगी तो उसे सख्ती से रोका जाएगा। जिसे गैर शरई काम करना है वह जुलूस में शामिल न हो। कम अंजुमन शामिल हों, कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अदब और एहतराम के दायरे में रहना जरूरी है। हालांकि डीजे लेकर आने वाली कई अंजुमनों को रोका गया मगर अहसन मियां नाराज होकर वहां से चले गए।
जुलूस से पहले महफिल का आगाज हाफिज फुरकान रजा ने तिलावत-ए-कुरान से किया। मुफ्ती अब्दुल मन्नान संभली ने गौस-ए-पाक की करामत बयान की। संचालन मुस्तफा नूरी ने किया। जुलूस रवाना अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ दरगाह शाहदाना वली हाजिरी देकर रात में वापस रजा चौक पहुंचकर संपन्न हुआ। जगह जगह फूल बरसाकर जुलूस का इस्तकबाल किया गया। सबील और लंगर भी बांटा गया। व्यवस्था अंजुमन के सचिव अजमल नूरी, औरंगजेब नूरी, जमन रजा, वसीम तहसीनी, तनवीर तहसीनी, शाहिद नूरी, नासिर क़ुरैशी, परवेज नूरी, ताहिर अल्वी, मंजूर खान, मुजाहिद बेग, तारिक सईद, मोहसिन रजा, जावेद खान, मोइन सिद्दीकी आदि ने संभाली।