बरेली। हरदोई जिले के पिहानी क्षेत्र में स्थित धोबिया आश्रम के जलस्रोत गोमती नदी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इन जलस्रोतों का पानी करीब से गुजर रही गोमती नदी तक पूरे साल पहुंचता रहता है। गोमती के आसपास की सांस्कृतिक विरासत को संकलित करने में जुटे सुशील सीतापुरी के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला है।
चपरतला (लखीमपुर-खीरी) की स्वयंसेवी संस्था सेवा सदन के बैनर तले संचालित ''''मैं तुम्हारी गोमती हूं'''' नामक अभियान के अंतर्गत उन्होंने नदी के घाटों, मंदिरों, मेलों, परंपराओं तथा निकटवर्ती गांवों के जनजीवन का अध्ययन किया है। सुशील सीतापुरी कहते हैं कि धोबिया आश्रम तपोवन के नाम से प्रसिद्ध है। पूरा इलाका प्राकृतिक सुंदरता से भरा है। पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह स्थान एनएच-24 पर गुलाब जामुन के लिए मशहूर कस्बा मैगलगंज से सिर्फ 16 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित है। चारों ओर से सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता से भरे पड़े गोमती तट विकसित किए जाएं तो राज्य में पर्यटन बढ़ेगा।
पीलीभीत है गोमती नदी का उद्गम स्थल, महाभारत काल से है जुड़ाव
गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले के माधोटांडा क्षेत्र स्थित फुलहर में है। सुशील सीतापुरी बताते हैं कि हरदोई-सीतापुर जिले की सीमा से कुछ दूर लखीमपुर जिले में धोबिया नामक गांव है। जनश्रुति के मुताबिक धोबिया का नाम कभी धौम्या था, जो अपभ्रंश होकर धोबिया हो गया। धौम्य ॠषि, पांडवों के कुल पुरोहित थे जो वनवास के दौरान भी पांडवों के साथ थे। इसी धोबिया गांव की सीमा में वन क्षेत्र में तपोवन सिद्धाश्रम है। इसे धौम्य ऋषि की तपस्थली माना जाता है। लोक मान्यता है कि पांडवों ने भी यहां कुछ दिन प्रवास किया था। कहा तो यह भी जाता है कि प्यास लगने पर एक बार अर्जुन ने बाण चलाकर इस धरती से जलस्रोतों की उत्पत्ति की थी। जलस्रोत देखने के लिए आसपास के जनपदों से प्रतिदिन लोगों का आना-जाना लगा रहता है।