जेल प्रशासन की मिलीभगत के बिना नहीं पहुंच सकता मोबाइल
सेंट्रल जेल में कुख्यात और अधिकतर मामलों में सजायाफ्ता अपराधियों को रखा जाता है। ऐसे में वहां मोबाइल और सिमकार्ड तो दूर, बिना अनुमति के सुई तक ले जाना नामुमकिन है। हालांकि बड़े अफसरों की मिलीभगत से जेल में मोबाइल और सिमकार्ड पहुंच जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक महीने में मोटी रकम देने वाले बंदियों को मोबाइल चलाने की सहूलियत दी जाती है। कभी-कभी जेल वार्डन भी रुपये लेकर मोबाइल पहुंचा देते हैं।
बिथरी स्थित सेंट्रल जेल टू में बंद अशरफ को भी मोबाइल की सुविधा दी गई थी जिससे उसने उमेशपाल हत्याकांड की साजिश रची। बीच में सख्ती हुई, उसके बाद जेलों की सुरक्षा फिर पुराने ढर्रे पर चली गई। इधर, अब जेल से वीडियो वायरल होने के बाद सेंट्रल जेल प्रशासन में फिर उथल-पुथल है। प्रभारी जेल अधीक्षक व अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि पुलिस को जानकारी देर से हुई और जब जेल में छापा मारा गया, इसलिए कुछ खास नहीं मिला। अब जांच पर निगाहें टिकी हैं।
महानिदेशक जेल एसएन साबत ने बताया कि बरेली सेंट्रल जेल में बंद आरोपी का लाइव वीडियो सामने आने पर डीआईजी जेल कुंतल किशोर को जांच दी गई है। सेंट्रल जेल टू के अधीक्षक विपिन मिश्रा भी जांच में सहयोग करेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।