बरेली। बायोमेट्रिक फिंगर स्कैनर (बीएफएस) पर अंगुली की छाप के बाद हाथ नहीं धो रहे तो गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के महामारी विज्ञान विभाग की टीम के शोध में बीएफएस पर बैक्टीरिया की कॉलोनी के विकास का पता चला है। 23 प्रजातियों के 58 बैक्टीरिया की जांच में 42 पर एंटीबाॅयोटिक दवाएं भी बेअसर रहीं।
विभाग प्रमुख डॉ. बीआर सिंह ने बताया कि वर्तमान में बायोमेट्रिक डिवाइस (बीडी) का चलन बढ़ा है। ऐसे में फिंगरप्रिंट स्कैनर (एफपीएस) पर बैक्टीरिया की मौजूदगी का आकलन करने के लिए शोध हुआ। उनके नेतृत्व में विभाग के वैज्ञानिक, शोध छात्रों ने सार्वजनिक स्थलों-कार्यालयों में प्रयोग किए जा रहे 17 बीडी के एफपीएस का अध्ययन किया। इन पर 23 प्रजातियों के बैक्टीरिया पनपते मिले। इनमें से 58 बैक्टीरिया को आइसोलेट कर उनपर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव का अध्ययन किया। पता चला कि 42 बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक का असर नहीं हुआ। जहां एफपीएस कम प्रयोग हो रहे हैं, वहां तेजी से बैक्टीरिया के पनपने की पुष्टि हुई।
एफपीएस पर एक एरोमोनास बेस्टिएरम, दो एमीडिया, दस एंटरोबैक्टर एग्लोमेरेंस, दो इरविनिया मैलोटिवोरा, एक एस्चेरिचिया कोली, क्लेबसिएला निमोनिया से संबंधित ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया मिले। पांच प्रजातियों के 40 ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया मिले। एक बीडीएस पर बैसिलस थुरिजिएंसिस बैक्टीरिया मिले।
स्टेफिलोकोसी के 22 आइसोलेट्स पर मेथिसिलिन और ऑक्सासिलिन एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर रहीं। एंटरोकोकस, ई फेकलिस और स्टैफिलोकोकस ऑरियस पर वैनकोमाइसिन दवा बेअसर रही। स्टैफिलोकोकस क्रोमोजेंस, स्ट्रेप्टोकोकस मिलेरी बैक्टीरिया पर लाइनजोलिड दवा बेअसर रही। 10 बैक्टीरिया कार्बापेनम दवा के प्रतिरोधी थे।
डॉ. बीआर सिंह के मुताबिक अध्ययन से संकेत मिले हैं कि बीडी में मिले सुपरबग की चपेट में आने पर व्यक्ति की हालत गंभीर हो सकती है। क्योंकि, संक्रमण लगा तो कोई दवा असर नहीं करेगी। लिहाजा, सामान्य उपयोग के लिए स्पर्श-रहित बीडी के तौर पर फेस डिटेक्टर, रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन के प्रयोग का सुझाव दिया है।
डॉ. सिंह ने बताया कि मोबाइल फोन, लिफ्ट, सार्वजनिक एस्केलेटर पर भी ऐसे प्रतिरोधी बैक्टीरिया होने की आशंका है। इस संबंध में भी जांच की गई थी। इसकी रिपोर्ट मिली है, जिसे देखा जा रहा है।