इस मामले की जांच वित्त एवं लेखाधिकारी ने की थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि पटल लिपिक कलीम ने जांच के दौरान चेक काटने की मंजूरी, कैशबुक और चेकबुक भी प्रस्तुत नहीं की। इससे स्थिति और संदेहास्पद हो रही है। माना जा रहा है कि इस तरह की गड़बड़ और भी हो सकती हैं। दूसरी ओर लिपिक को सस्पेंड तो कर दिया गया है लेकिन उसे जीपीएफ भुगतान का रिकार्ड नहीं लिया गया है। डीआईओएस आशुतोष भारद्वाज का कहना है कि निलंबित लिपिक से जल्द पटल का चार्ज दूसरे लिपिक को दिलाया जाएगा। सारा रिकार्ड उससे हैंडओवर किया जाएगा। अगर रिकार्ड गायब मिला तो और कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि एओ की जांच अभी जारी है। वह पिछले वर्षों के भी जीपीएफ के सभी भुगतान के मामलों की जांच पड़ताल करेंगे। देखेंगे कि किसी फर्जी शिक्षक को भुगतान तो नहीं किया गया। बता दें कि पकड़े गए मामले में आंवला के चाचा नेहरू इंटर कॉलेज की फर्जी शिक्षिका शाजिया परवीन के नाम से सवा 19 लाख रुपये का चेक काटा गया। इसे भुगतान से पहले भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में पकड़ लिया गया।