बरेली। विंडरमेयर के मंच पर मंगलवार की शाम बिखरी सांस्कृतिक छटा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के पंथी नृत्य ने जहां लोगों को आकर्षित किया, वहीं कथक की प्रस्तुति ने समा बांध दिया। दोनों ही प्रस्तुतियों का लोगों ने हाॅल में खड़े होकर तालियों से स्वागत किया।
संत कबीर अकादमी, मगहर और दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट, बरेली की ओर से आयोजित दो दिवसीय रामोत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आए अंतरराष्ट्रीय जय सतनाम पंथी सुखदेव दास बंजारे के निर्देशन में उनके दल ने ''''पंथी नृत्य'''' प्रस्तुत किया।
इसमें नृत्य करते कलाकारों ने स्वयं गायन, वादन के साथ प्रस्तुति देकर दर्शकों को चकित कर दिया। खासतौर से इसमें पिरामिड कला और योग का प्रयोग कर प्रस्तुति को आकर्षक बना दिया। कलाकारों ने यह नृत्य- ''''सत्य नाम सत्य सार महिमा अपार, तर जांहि संसार सत गुरु ज्ञान बताई...'''' के बोल पर किया। साथ में कलाकार मांदर, करताल, झांझ और झुमका का भी वादन करते रहे।
इसके पश्चात आगरा से पधारीं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नृत्यांगना देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी ने कथक और मिश्रित लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों से खूब वाह-वाही लूटी।
इससे पहले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेमंत मनीष शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह, दयादृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के दानिश खान व संत कबीर अकादमी के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन डॉ. हितु मिश्रा ने किया। अंत में वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह ने आभार व्यक्त किया।