बरेली। सदर बाजार की रामलीला में समाज के नाटक में सुल्ताना डाकू नाटक का मंचन किया गया। सुल्ताना बचपन में छोटी-मोटी चोरियां करता था, लेकिन उसकी मां उसे डांटने के बजाय उसकी हरकतों को नजरअंदाज कर देती थी। इससे उसका हौसला बढ़ता गया और फिर वह इतना दुर्दांत डकैत बन गया कि अंग्रेज हुकूमत भी उससे खौफ खाती थी। अंग्रेजों ने उसे पकड़ने के लिए इंग्लैंड से यंग नाम के पुलिस अधिकारी को बुलाया। फांसी के समय सुल्ताना ने मां से मिलने की अंतिम इच्छा जताई। मां मिलने आई तो सुल्ताना ने यह कहकर उसकी नाक काट ली कि अगर बचपन में उसने चोरी करने से मना किया होता तो वह डाकू नहीं बनता। सुल्ताना का अभिनय निर्देशक सुनील कुमार सिंह ने किया। सुरेश तिवारी और सत्यधीर उपाध्याय का अभिनय भी दमदार रहा।