बरेली। रजऊ परसपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बंद होने के बाद शहर से हर रोज निकल रहे साढ़े चार सौ मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण का कोई इंतजाम नहीं है। आम शिकायत है कि कूड़े के ढेर सड़कों और मोहल्लों से उठने बंद हो गए हैं लेकिन स्वच्छता के तौर-तरीके सीखने के लिए नगर निगम अफसरों का देश के बड़े-बड़े शहरों में भ्रमण जारी है। हाल ही में अफसरों की टीम भोपाल दौरे पर लाखों फूंककर लौटी है।
रजऊ परसपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट एयरफोर्स के प्रस्ताव पर बना था लेकिन चल नहीं पाया। दरअसल यह प्लांट मेयर उमेश गौतम की इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के बराबर बना था, इस कारण उन्होंने इसे बंद कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। यह प्लांट बंद होने के लंबे समय बाद तय हो पाया कि फरीदपुर रोड पर ही गांव सथरापुर में नया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया जाएगा। करीब तीन साल पहले सथरापुर में प्लांट का निर्माण शुरू हुआ लेकिन अब तक पूरा नहीं हो पाया। नगर निगम ने भी ऐसी कोई कोशिश नहीं की कि जल्द प्लांट लग जाए ताकि शहर के कूड़े के निस्तारण की समस्या खत्म हो जाए।
आठ सालों से नगर निगम अपने अफसरों और पार्षदों को सैर जरूर करा रहा है। इंदौर, चंडीगढ़, सूरत, मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों के भ्रमण पर अब तक लाखों फूंके जा चुके हैं लेकिन शहर का हाल नहीं बदल पाया। हाल ही में अपर नगर आयुक्त सुनील कुमार यादव, महाप्रबंधक जलकल आरके यादव भोपाल में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट देखकर लौटे हैं। भोपाल के कूड़ा निस्तारण के मॉडल को अब बरेली में लागू करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यह सवाल बरकरार है कि जब प्लांट ही तैयार नहीं हो पा रहा है तो कूड़ा निस्तारण का भोपाल मॉडल कैसे लागू हो पाएगा।
सथरापुर प्लांट : अभी लगेगा और समय
करीब तीन साल पहले सथरापुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए साठ बीघा जमीन खरीदी गई। प्लांट की इमारत के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 15 करोड़ से अधिक रकम जारी की। मशीनों की खरीद के लिए बजट मिलना बाकी है। सथरापुर में प्लांट की चहारदीवारी और मुख्य गेट बन गया है। सड़क भी अंदर बनाई गई हैं। मशीनों के लिए फाउंडेशन भी तैयार कर दिया गया है। इतना काम कराने में नगर निगम के अफसरों को दो साल से ज्यादा वक्त लग गया। फिलहाल मशीनें खरीदने का बजट नहीं है लिहाजा यह भी तय नहीं है कि यह प्लांट कब तक बनकर तैयार होगा। हालांकि फिर भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार का दावा है कि सथरापुर में कचरा निस्तारण प्लांट डेढ़ से दो महीने में चालू करा दिया जाएगा।
बाकरगंज का कूड़ा नहीं हो पाया सथरापुर में शिफ्ट
शहर से हर दिन 450 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है जिसमें से काफी बाकरगंज में डाला जा रहा है। अनावश्यक पैसे की बर्बादी का हवाला देते हुए कुछ पार्षदों ने मांग की थी कि इसे सीधे सथरापुर पहुंचाया जाए ताकि प्लांट शुरू होने के बाद इसे दोबारा बार-बार गाड़ियों में लादकर वहां न पहूंचाना पड़े लेकिन नगर निगम के अफसरों ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया। बाकरगंज में कूड़े का पहाड़ बन चुका है। यहां कितना कूड़ा इकट्ठा है, इसका अंदाजा लगाना भी अब मुश्किल हो गया है।
फिर भी गांवों को दिखा रहे हैं विकास का सपना
गंदगी से शहर का बुरा हाल होने के बावजूद कई गांवों को नगर निगम में शामिल कर उनका विकास कराने का सपना दिखाया जा रहा है। हाल ही में नगर निगम की ओर से तीन गांवों पर दावा ठोकते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा है, लेकिन इस पर गांव से ही विरोध हो रहा है। कई साल पहले शहर में शामिल किए गए इलाकों की दुर्दशा का भी हवाला दिया जा रहा है। दरअसल, नगर निगम की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के पीछे नजदीक आ रहे निकाय चुनाव के वोटों के गणित को वजह माना जा रहा है। शहर की आबादी में नगर निगम की कार्य प्रणाली को लेकर मायूसी का माहौल है, लिहाजा गांवों को शामिल कर नए वोटरों की मदद से चुनाव जीतने की रणनीति भी इसकी वजह बताई जा रही है।
भोपाल के भ्रमण के दौरान देखा कि वहां कूड़ा निस्तारण प्लांट बेहतर काम कर रहा है। इस प्लांट के भ्रमण की रिपोर्ट तैयार की जा रही है जो उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। - आरके यादव, महाप्रबंधक जलकल विभाग नगर निगम