बरेली। तीन दिनों से लगातार तेज हवा के साथ हो रही बारिश आफत साबित हुई। 24 घंटे में 51.3 मिमी बारिश ने शहर से गांव तक मुश्किलें पैदा कीं। वहीं पहले सूखा और अब भारी बारिश से किसानों की बची हुई उम्मीदें भी परवान नहीं चढ़ सकीं। शहर में कई इलाकों में जलभराव से लोगों को खासी दिक्कतें हुईं। बारिश से सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो गईं। जहां जलभराव नहीं हुआ वहां धान की फसल गिर गईं। नदियों के बढ़ते जल स्तर से ग्रामीणों ने एहतियातन जान-माल की सुरक्षा के लिए अघोषित अलर्ट जारी कर रखा है। कृषि विभाग ने बर्बाद बीमित फसल की सूचना देने को कहा है।
बेमौसम बारिश ने भले ही गर्मी से लोगों को निजात दिलाई हो पर जिले के करीब पांच लाख से ज्यादा किसानों के लिए खौफ की वजह बन चुकी है। करीब पांच माह के मौसम में तमाम उतार-चढ़ाव के साथ किसानों के दिन गुजर रहे हैं। प्रगतिशील किसान सर्वेश के मुताबिक किसानों ने इस साल बारिश न होने से फसल बचाने के लिए पहले ही काफी खर्चा किया था। लागत निकल जाए यही उम्मीद थी पर बेमौसम बारिश ने यह कसर भी तोड़ दी है। बालियां निकलने के बाद फसलें जलमग्न हो गई हैं। अब अगर बरसात थम भी जाए तो उत्पादन प्रभावित होना तय है। बालियां पकेंगी या फसल सूखेगी यह आगे तय होगा।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक पहले सूखे से करीब 25 फीसदी धान का रकबा कम हुआ। सिंचाई प्रभावित होने से करीब 15 फीसदी और फसल उपज कम रही। अब हो रही बारिश से धान की गिरी हुई करीब दस फीसदी फसल की उपज प्रभावित होगी। वहीं, आगामी दिनों में भी अगर बारिश का मौसम बना रहा तो करीब 60 फीसदी तक धान की फसल बरबाद होने की आशंका जताई है।
कल से बारिश का मिजाज नर्म पड़ने के आसार
बारिश से सोमवार से निजात मिलने की उम्मीद है। आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के मुताबिक रविवार को भी तेज बारिश होगी पर देर रात हवाओं की दिशा बदलने और उच्च वायुदाब का क्षेत्र भी बनने के संकेत मिल रहे हैं। लिहाजा, सोमवार को बादलों के मंडराने से रिमझिम बारिश के ही आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान में सामान्य से 11 डिग्री कम 21.9 डिग्री, न्यूनतम दो डिग्री गिरावट के बाद 19.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नमी का स्तर सौ फीसदी दर्ज किया गया।
आंवला : पंपिंग सेट से बचाई फसल बरसात ने की बर्बाद
बारिश के बाद बर्बाद फसल के आकलन के लिए एसडीएम एनराम ने लेखपालों की टीम गठित कर दी है। उन्होंने सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इधर, ग्राम पैगा के किसान नीरज ने बताया कि उन्होंने दस बीघा में धान की खेती की थी। पहले सूखे से फसल बचाने के लिए पंपिंग सेट से सिंचाई कराई और अब बारिश मुसीबत है। मनौना गांव के किसान अनीस ने बताया कि सूखे से फसल बचाने के लिए उन्होंने कर्ज ले लिया है। फसल बेचकर कर्ज चुकाना था, पर बारिश ने खड़ी फसल बिछा दी। आसपुर के किसान सुदेश सिंह ने भी पंपिंग सेट से सिंचाई कराई थी और उत्पादन को लेकर असमंजस में हैं।
मीरगंज : जलस्तर बढ़ने का डर, कैसे बचाएं कच्चा घर
साल 2011 में बाढ़ से क्षेत्र के कई मकान ढह गए थे। वहीं, इस बारिश ने ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ग्राम प्रधान शरीफ खां ने बताया कि धर्मपुरा गांव कुल्ली और बहगुल नदी के बीच बसा है। गांव में जलभराव से ग्रामीण दहशत में हैं। सुलतानपुर गांव में भी कमोवेश यही हाल है। दुनका बिहारीपुर मार्ग पर जलप्रवाह से आवागमन बाधित है। एसडीएम ने एडीएम एफआर संतोष बहादुर सिंह के साथ शाही, मिर्जापुर, आनंदपुर, अक्सौरा, दुनका, सुलतानपुर, गनेशपुर, बसई सहोडा, सीहोर हल्दीकला, परचई, म्यूडी बुजुर्ग आदि गांवों का निरीक्षण किया।
चौतरफा जलभराव से घरों में नहीं जले चूल्हे
बारिश से रामगंगा के खादर तराई क्षेत्र में भारी जलप्रवाह की स्थिति है। नुकसान इस कदर है कि घरों में चूल्हे तक जलना मुश्किल है। शिशुपाल सिंह के मुताबिक उन्होंने 20 बीघा उड़द 10 बीघा लाही की खेती की थी। सत्यपाल कश्यप ने आठ बीघा धान और छह बीघा उड़द बोई थी। ठाकुर लल्ला सिंह ने तराई में सौ बीघा उड़द बोये थे। अतिवीर सिंह की 50 बीघा में लाही डूब रही है। ग्राम धोरेला के रामप्रकाश कश्यप, भगवान सिंह यादव, तुलाई राम के धान, उडद की फसल चौपट हो गई हैं। रामनगर, हरदासपुर, बरसेर, संग्रामपुर धान समेत गन्ने की फसल भी गिर चुकी हैं।
फसल उठ गई तो लागत निकलने की उम्मीद
भारी बारिश के चलते धान, गन्ना और सब्जियों की फसल खेतों में जलमग्न हैं। किसानों के मुताबिक धान की तैयार फसलें जिनकी कटाई शुरू होनी थी वह खेतों में बिछ गई है। किसान सूरजपाल, नन्हे लाल, छत्रपाल सिंह ने कहा कि अगर सही से फसल उठ जाएगी तो उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद है। कहा कि तीन दिन से खेतों में गिरा धान अब सड़ने लगा है। बताया कि पिछले साल भी धान की फसल को बेमौसम बारिश से भारी नुकसान हुआ था। इस बार पहले सूखे के चलते सिंचाई करनी पड़ी और अब बेमौसम बारिश ने किसान की कमर तोड़ दी है। जिससे किसानों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।
राजस्व निरीक्षक ने फसलों का किया निरीक्षण
शाही। शनिवार को एसडीएम के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक बीके कटियार ने पांच लेखपालों की टीम के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने रिपोर्ट प्रशासन को भेजने की बात कही। बताया कि रविवार को राजस्व टीम किसानों के नुकसान का सर्वेक्षण करेगी। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने मीरगंज तहसीलदार के साथ जुनहाई, मिर्जापुर समेत अन्य कई गांवों का औचक निरीक्षण किया। संवाद
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रामपुर गार्डन, सिविल लाइन, किला, एकता नगर, राजेंद्र नगर, जनकपुरी इलाके में भी पानी ही पानी
बरेली। दो दिन से हो रही बारिश से शहर का बुरा हाल है। शनिवार को हुई बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। कई मार्गों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। वाहन चालकों को भी जलभराव से परेशानी हुई। चौपुला पर जाम जैसी स्थिति रही। हालांकि वाहन रेंग-रेंगकर चलते रहे।
कर्मचारी नगर, चौपुला पुल के नीचे पानी ही पानी
बारिश सुबह आठ बजे से धीरे-धीरे शुरू हुई जो पूर्वाह्न 11 बजे जाकर तेज हो गई। लगभग दो घंटे हुई तेज बारिश में जलभराव हो गया। रामपुर गार्डन, सिविल लाइन में मुख्य मार्गों पर पानी भर गया। वहीं विकास भवन मार्ग पर संयुक्त शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने भारी जलभराव हो गया। यहां बनी नाली भी उफन आई। चौपुला पुल के नीचे जलभराव हो गया। इसके अलावा स्टेडियम मार्ग, संजय नगर, किला, एकता नगर, राजेंद्र नगर, जनकपुरी क्षेत्र में भी पानी भर गया। गलियों की नालियां पूरी तरह भर गईं। कर्मचारी नगर में भास्कर अस्पताल के सामने वाली सड़क पर भी भारी जलभराव हो गया।
हजियापुर का मुख्य मार्ग डूबा, गंगापुर मार्ग भी जलमग्न
हजियापुर मार्ग पर बन रहे यूनानी मेडिकल कॉलेज के आगे तिराहे पर भारी भलभराव हुआ। तीन घंटे तक यहां लोगों की आवाजाही नहीं हो पाई। गंगापुर मार्ग पर भी जलभराव हुआ। जिला अस्पताल के पिछले हिस्से में भी पानी भर गया। बिहारीपुर, सिकलापुर की सड़कें भी जलमग्न रहीं। इज्जनगर स्टेशन के सामने, सिटी स्टेशन के सामने भी काफी पानी भर गया। कुछ दुपहिया वाहन चालक जलभराव के कारण गिर भी गए। बदायूं रोड का भी हाल बुरा रहा। करगैना चौकी के पास अधिक जलभराव हुआ।
नाला सफाई अभियान की खुली पोल
नगर निगम की ओर से इस बार 26 बड़े नाले व 220 छोटी नालियों की सफाई लगभग सवा करोड़ में करवाई गई। यह अभियान सितंबर माह तक चरणवार चला लेकिन यह काम नहीं आया। गर्मियों में भी दो बारिश में ही जलभराव हो गया। यही हाल शनिवार को रहा। लोगों ने सवाल खड़े किए कि यदि मुख्य नालों की सफाई तलीझाड़ हो जाती तो जलभराव इतना नहीं हुआ होता। पानी की निकासी भी नहीं हो पाई। विकास भवन मार्ग पर शाम तक पानी भरा रहा। यही हाल संजयनगर मार्ग का रहा।