अदालत के आदेश के बाद भी डेढ़ महीने तक पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जब अदालत ने आख्या मांगी तो बताया कि 26 अप्रैल के आदेश पर आठ जून को रिपोर्ट दर्ज की गई है। इस पर अदालत ने शुक्रवार को इंस्पेक्टर फरीदपुर को तलब कर जवाब मांगा है कि आखिर आदेश के बाद भी रिपोर्ट दर्ज करने में इतने दिन क्यों लगे।
भुता के इमरान ने अदालत में दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि उसके पिता अमजद खां कमजोर दिमाग के थे। उनकी सोचने समझने की शक्ति खत्म हो चुकी थी। जिनसे आजाद, उस्मान खां, इरशाद खां और अनीसा आदि ने 16 मई 2015 को वसीयत करा ली और चार दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई तथा आनन फानन में उनका अंतिम संस्कार करा दिया। रिपोर्ट न लिखे जाने पर इमरान ने न्यायालय की शरण ली थी। इस पर प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शक्ति सिंह ने 26 अप्रैल को फरीदपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक को घटना की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए थे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इस पर अदालत ने फिर पीड़ित इमरान के प्रार्थनापत्र पर थाना फरीदपुर से आख्या तलब की तो बृहस्पतिवार को थाना से आख्या दी गई कि आठ जून को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले में दस जून तिथि नियत करते हुए प्रभारी निरीक्षक को तलब किया है तथा स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि वे स्वयं उपस्थित होकर बताएं कि कोर्ट का रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश कब मिला और प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने में इतने दिन क्यों लगे। दूसरी ओर थाना किला के प्रभारी निरीक्षक ने कोर्ट में उपस्थित होकर जानकारी दी कि सुधा मैसी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है तथा पुलिस क्षेत्राधिकारी ने विवेचना शुरू कर दी है। उन्होंने कोर्ट को यह भी विश्वास दिलाया कि कोर्ट के आदेश पर लंबित सभी मामलों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली गई हैं।