पुलिस बेशक बरेली के ‘कोली’ विजय कुमार से कुछ खास जानकारी हासिल नहीं कर सकी, मगर बच्चों को उसने पूरी प्लानिंग से ही उठाया था। बच्चे जिन स्थानों से उठाए गए, आमतौर पर दिन में भी वहां ज्यादा चहल-पहल नहीं रहती हैं। एक बार बच्चे कब्जे में आ गए तो उन्हें लेकर वह निकलने लगा, इसके लिए बच्चों को पहले टॉफी का लालच दिया फिर रुपये थमाकर आगे ले जाने लगा, मगर इसी बीच पकड़ा गया।
विजय कुमार बच्चों को अगवा करने के लिए पूरी तैयारी करके ही निकला था। एजाजनगर गौंटिया से जरी कारीगर सईद की बेटी जोया, बेटे फैज और भाई रफीक की बेटी जैनब को विजय ने सबसे पहले उठाया। जोया ने बताया कि उसे ‘अंकल’ (विजय) ने एक टॉफी दी। आगे चलकर और दिलाने को कहा। इसके बाद तीनों उसके साथ हो लिए। थोड़ा आगे बढ़कर उसने जोया और जैनब को दो-दो रुपये दिए। एक रुपया फैज को दिया। इसके बाद बच्चे उसकी उंगली पकड़कर बात करते हुए साथ चलने लगे। हजियापुर से विजय ने निशा को गोदी में उठा लिया। निशा को उसने कुछ नहीं दिया। इसके कुछ ही देर बाद लोगों ने उसे देख लिया तो वह बच्चे फेेंककर भागने लगा और पकड़ा गया।