अदालत ने उसे गर्भपात की अनुमति नहीं दी और नौ महीने अनचाहे बच्चे को कोख में पालने के बाद दुष्कर्म की शिकार हुई बच्ची गुरुवार को मां बन गई। अब उसके सामने एक और दुविधा आन खड़ी है वह बच्चे को निहार रही है उसे अपने पास रखना चाहती है लेकिन परिवार वाले इसके पक्ष में नहीं हैं। अस्पताल में किशोरी पिता रोते हुए बोले: नहीं रखना है ये बच्चा, मेरी बच्ची की जिंदगी का भी सवाल है। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
एक साल पहले शेरगढ़ क्षेत्र की 16 वर्षीय किशोरी दुष्कर्म का शिकार हुई थी। आरोपी जेल में है। घटना के 21 सप्ताह बाद जब बच्ची के परिजनों को गर्भवती होने की बात पता चली तो उन्होंने गर्भपात कराना चाहा लेकिन डॉक्टराें ने मना कर दिया। पिता ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी लेकिन कोर्ट ने मामला सीएमओ पर छोड़ दिया। सीएमओ की टीम ने भी जांच के बाद जच्चा के जीवन को खतरा मानते हुए गर्भपात करने से मना कर दिया था। बुधवार को रात 10 बजे बच्ची को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। 102 से उसे शेरगढ़ सीएचसी लाया गया। यहां डॉक्टरों ने कम उम्र और पहली डिलीवरी में अनहोनी की आशंका को देखते हुए बरेली के लिए रिफर कर दिया। रात में करीब दो बजे बरेली लाते समय फतेहगंज और भमौरा के बीच एंबुलेंस में ही उसका प्रसव हो गया। उसने बेटे को जन्म दिया है। महिला अस्पताल में अभी दोनों का इलाज चल रहा है, डॉक्टराें ने हालत ठीक बताई है। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि किशोरी बार-बार अपने बेटे को देख रही है। उसके मन में ममता उमड़ रही है और चेहरे पर दर्द है। हंसाने की कोशिश भी की गई लेकिन वह मुस्कराई तक नहीं।
- इस बेटे की खुशी नहीं
किशोरी के पिता के चार बेटे और दो बेटियां हैं। जो बेटी मां बनी है वह चौथे नंबर पर है। पिता कहते हैं कि बेटा चाहे तो आरोपी का परिवार रखे या फिर इसे किसी केंद्र में दे। उन्हें बेटा नहीं रखना है। बच्ची की जिंदगी का सवाल है, वह उसे बर्बाद नहीं करेंगे।