19 अगस्त की रात को उमरसिया गांव में पति के साथ खेत से लौट रही महिला के साथ बभिया गांव के युवकोें ने गैंगरेप किया था। पुलिस ने इस मामले को इतने हल्के में लिया था कि रात्रि अधिकारी दरोगा राजू राव ने मौके पर जाने तक की जहमत नहीं उठाई थी। तत्कालीन इंस्पेक्टर देवराज राठी ने कहा था कि मैं सेना भर्ती ड्यूटी में हूं, सुबह दिखवा लूंगा। परिवार वालों ने महिला को खुद ही जिला अस्पताल लाकर भर्ती करा दिया था। बाद में यह मामला सुर्खियों में आने पर पुलिस ने मुकदमा लिखकर आरोपियों को चिहिन्त करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। तत्कालीन सीओ तृतीय धर्म सिंह मार्छाल को इस मामले जांच दी गई। सितंबर माह के अंत में इस मामले में दो जांच रिपोर्ट बनी। पांच पेजों की दो जांच रिपोर्ट के चार पेजों में एक ही भाषा लिखी है। आठ दिन बदली गई जांच रिपोर्ट का आखिरी पेज बदल दिया गया है। पहली जांच रिपोर्ट में सीओ ने इंस्पेक्टर देवराज राठी और दरोगा राजू राव को गुनहगार बताया था। जबकि बभिया चौकी इंचार्ज रविंद्र शर्मा को बचा दिया था। लेकिन दूसरी रिपोर्ट में इंस्पेक्टर और दरोगा को सीओ ने दोष मुक्त करके बभिया चौकी इंचार्ज रविंद्र शर्मा को दोषी ठहरा दिया। सीओ की रिपोर्ट पर दरोगा रविंद्र शर्मा को मिस्स कंडेक्ट मिल गई। इससे खफा दरोगा ने डीआईजी से मुलाकात करके उनके सामने सीओ की दोनों जांच रिपोर्ट पेश कर दी। डीआईजी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। डीआईजी ने बताया कि जांच बदलना गंभीर बात है। इस मामले की जांच कराई जा रही है। दोषी होने पर कार्रवाई भी होगी।