बरेली। त्रिशूल एयरबेस की जर्जर बाउंड्रीवॉल खुद उसके लिए बड़ा खतरा है। कई जगह से यह दीवार टूटी हुई है। कोई भी बच्चा या दुबला-पतला व्यक्ति आसानी से एयरबेस में घुस सकता है। बाहर से अंदर की गतिविधियां साफ दिखाई देती हैं। पठानकोट पर हमले के बाद जब सुरक्षा के हर पहलू पर नजर डाली जा रही है तो ऐसे में यह टूटी दिवार देखने वालों को भी खटक रही है।
आईवीआरआई रोड पर परतापुर चौधरी गांव से लेकर कंजादासपुर होते हुए गेट नंबर एक आलोक नगर सहित दर्जनभर गांवों के बाहरी इलाके में बनी त्रिशूल एयरबेस की बाउंड्रीवॉल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगह तो बड़े छेद हो गए हैं। जगह - जगह से लोहे के कटीले तार और उनको लगाने के लिए दीवार में बनाए खंभे तक गायब हो गए हैं।
1962 में चीन और भारत के बीच युद्ध के दौरान रक्षा मंत्रालय को बरेली में सेना का एक एयरबेस स्थापित करने की जरूरत महसूस हुई थी। उसी के बाद 1963 में आईवीआरआई के निकट खाली पड़ी भूमि प्रदेश सरकार ने वायु सेना मुख्यालय को सौंप दी थी। इस भूमि पर त्रिशूल नाम से नया एयरबेस बना और उसी समय इस बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया। तब से इस बाउंड्रीवॉल की मरम्मत तक नहीं हुई है।
‘त्रिशूल एयरबेस की खस्ता हाल बाउंड्रीवॉल जिला प्रशासन और वायु सेना के अधिकारियों के संज्ञान में है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे ऊंचा कराने के साथ-साथ कटीले तार लगाए जाने हैं। सीसी कैमरे भी बैक साइड में बढ़ेंगे। इस बारे में रक्षा मंत्रालय को वायु सेना के स्थानीय अधिकारियों की ओर से प्रस्ताव भेज दिया गया है। बाहर चारों ओर सड़क भी बनेगी।’
गौरव दयाल, डीएम