प्रेमनगर के जरी ठेकेदार शाहबेज पहले ही दिन से लड़की को धोखा देता रहा। रेप के बाद निकाह करने और बेटी बिकवाने के बाद तलाक देने पर कानूनी शिकंजे में फंसा तो पुलिस ने भी उसकी मदद कर दी, लेकिन वह समझौते पर खरा नहीं उतरा। शाहबेज निकाह करने के बजाए बहन के घर पूरनपुर में जाकर रहने लगा। लड़की अपना घर पाने के लिए बार-बार छली जाती रही। अब उसके आंखों में आंसू तो हैं लेकिन जिद भी है कि जिसने उसे इस राह पर लाकर खड़ा कर दिया उसे छोड़ेगी नहीं।
शाहबेज और उसके पिता के खिलाफ रेप का मुकदमा लिखे जाने के बाद 28 जुलाई 2015 को उसने पुलिस की मदद से लड़की को समझौते के लिए राजी कर लिया था। शाहबेज ने तलाक देकर फरीदपुर के जिस बुजुर्ग से निकाह कराया था। उसने 25 जून को लड़की को तलाक दे दी थी। समझौते के मुताबिक इद्दत पूरी करने के बाद शाहबेज को फिर से लड़की से निकाह करना था। इसके लिए एक लाख 786 रुपये महर भी समझौते में तय हो गए थे। मुकदमा निपटाना था। इसलिए लड़की को शाहबेज के परिवार वालों ने 50 हजार रुपये नकद दिए थे। जबकि 50 हजार रुपये का चेक दिया था। लड़की ने चेक कैश कराने को लगाया तो बाउंस हो गया। मोहल्ले वालों के दबाव बनाने पर शाहबेज और उसके परिवार वाले 5 नवंबर को लड़की से फिर से निकाह करने को राजी हो गया था। शादी की तैयारी हो रही थी। इसी बीच शाहबेज और उसके परिवार वाले मुकर गए। काफी हो हल्ला होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन बात फिर भी नहीं बन पाई। पीड़िता का कहना है कि बेटी उसके जीने का सहारा थी, उसे भी शाहबेज ने बिकवा दिया।
नाना, मामा और फूफा ने भी किनारा किया
-शाहबेज के नाना, मामा और फूफा ने ढाल बनकर उसे कानूनी शिंकजे में फंसने से बचाने को समझौता नामा लिखवाकर पुलिस को सौंप दिया, लेकिन इसके बाद लड़की की मदद नहीं की। पीड़ित उनसे मदद मांगने जाती है तो भगा दिया जाता है।
पुलिस ने अपना काम कर दिया
-लड़की के रेप के आरोपों की विवेचना प्रेमनगर की कानूनगोयान चौकी इंचार्ज देवेंद्र सिंह ने की। विवेचक ने बताया कि हमने अपना काम कर दिया। समझौते के आधार पर ही लड़की ने कोर्ट में बयान दिया था। उसी के आधार पर हमने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। पीड़िता को चाहिए कि वह वह आला अधिकारियों से मिलकर फिर से विवेचना कराने की मांग करे।
बहन के घर में पनाह लिए है
इंसाफ को दर-दर भटकने वाली पीड़ित अपनी बहन के घर पनाह लिए है। उसके बहनोई की माली हालत भी अच्छी नहीं है। वह रिक्शा चलाकर अपने परिवार को पालते हैं। शाहबेज के परिवार का खौफ इतना है कि कोई उनके आगे मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। लड़की ने खुद ही इंसाफ के लिए जंग छेड़ने का ऐलान किया है।
कोर्ट में पीड़िता के 164 के बयान के आधार पर केस बंद कर दिया होगा। वह फिर से कोई शिकायत करती है तो पहले पुराने मुकदमे को खुलवाने की कोशिश की जाएगी। ऐसा न होने पर फिर से मुकदमा लिखाने का भी प्रावधान है-सिद्धार्थ वर्मा, सीओ सिटी प्रथम