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एडीएम बनकर बाइक मांगने पहुंच गया ठग

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यूनीवर्सिटी के सामने बांके बिहारी हीरो बाइक एजेंसी के जनरल मैनेजर को फोन पर अपने को  एडीएम बताकर बाइक देने का दबाव बनाने वाला  पीलीभीत जिले का एक ठग बृहस्पतिवार को पकड़ लिया गया। यह ठग फोन करते हुए खुद ही एजेंसी पर पहुंच गया। एजेंसी वालों ने भी उसे इज्जत से बैठाकर चाय पिलाई और चुपके से यूपी 100 डायल पुलिस बुलाकर उसे पकड़वा दिया। पुलिस उसे बारादरी थाने लेकर आई । पूछताछ हुई तो उसकी पोल खुल गई। 
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पीलीभीत बाईपास रोड पर यूनीवर्सिटी के सामने बाइक की बांके बिहारी नाम से बाइक की एजेंसी है। इस एजेंसी पर वीरसावरकर नगर के रहने वाले अमन सियाल जनरल मैनेजर हैं। उनके फोन पर बुधवार से एक युवक बाइक के लिए फोन कर रहा था। फोन करने वाला युवक अपना नाम कभी डीएम पंकज और कभी एडीएम अरुण कुमार बता रहा था। युवक ने बुधवार को एजेंसी के जीएम को कई फोन किए। यह बात उन्होंने अपने एमडी को बताई तो वह समझ गए कि यहां एडीएम अरुण तो हैं ही नहीं, इसलिए उनके और डीएम के नाम से कोई ठग फोन कर रहा है। इस पर एजेंसी के जीएम अमन ने बुधवार को युवक की कॉल आने पर उसे एजेंसी पर बुला लिया। इस युवक ने एक हीरो स्प्लेंडर और एक सुपर स्प्लेंडर बाइक देने को कहा। युवक ने कहा कि वह दोनों बाइक का पैसा एजेंसी के खाते में ट्रांसफर कर देगा। यह बात सुनकर एजेंसी वालों ने उससे इज्जत के साथ बैठाया और चाय पिलाने के साथ ही यूपी 100 डायल पर फोन किया। इस पर दरोगा शिशु पाल तुरंत एजेंसी पहुंच गए और युवक को पकड़कर थाने ले आए। दरोगा ने बताया कि युवक का नाम विवेक कुमार पुत्र राम प्रताप निवासी गांव महाबा थाना बीसलपुर (पीलीभीत) है। वह अपने को फर्जी तरीके से डीएम और एडीएम बताकर एजेंसी वालों को हड़काकर बाइक ऐंठना चाहता था, लेकिन उसकी पोल खुल गई। पूछताछ में पता चला कि विवेक के दो साथी गुडवीर सिंह पुत्र वीर पाल और रिंकू पुत्र रघुनंदन निवासी जमुनिया थाना निगोही (शाहजहांपुर) हैं, जो ठगी का धंधा करते हैं। 


वर्ष 2015 में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर तहसील पहुंच गया था 
बरेली। फर्जी डीएम और एडीएम बनकर बाइक ठगने की कोशिश करने वाला विवेक पहले भी दो बार ठगी में फंस चुका है। वर्ष 2015 में वह मीरगंज तहसील कार्यालय में कंप्यूटर आपरेटर पद का फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर पहुंच गया था और तहसीलदार पर ज्वाइनिंग कराने का दबाव भी बनाया था। जांच में नियुक्ति पत्र फर्जी पाए जाने पर मीरगंज थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद वर्ष 2016 में बारादरी के नवादा शेखान निवासी एक व्यक्ति से भी विवेक ने नौकरी के नाम पर ठगी करते हुए रंगदारी तक की मांग की थी। जिसका मुकदमा विवेक के खिलाफ बारादरी थाने में दर्ज है। 
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एजेंसी वालों ने लिखकर नहीं दी तहरीर
इंस्पेक्टर बारादरी राजेश सिंह का कहना है कि यूपी 100 डायल वाले हीरो एजेंसी वालों की सूचना पर विवेक को पकड़कर लाए थे। अब उन्होंने उसके खिलाफ लिखकर तहरीर नहीं दी, ऐसे में वह कैसे कार्रवाई करते। इसलिए विवेक को छोड़ा जा रहा है। 
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