Three divorces given by husband in the letter
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शेरगढ़ कस्बे में शौहर ने बाइक की चाहत में पहले बीवी को घर से निकाल दिया। फिर मायके में बीवी को खत लिखकर तीन तलाक दे दिया। बीवी ने पति के सामने मिन्नतें की, लेकिन पति का दिल नहीं पसीजा। उसने शर्त रख दी कि अब दोबारा साथ रहने के लिए बाइक लेकर आना होगा। बहनोई के साथ हलाला करना होगा। पीड़िता ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
उत्तराखंड के जिला हल्द्वानी में मोहल्ला तिकोनिया निवासी बशीर अहमद ने अपनी छोटी बेटी शहनाज का निकाह करीब डेढ़ साल पहले शेरगढ़ कस्बे के रईस अहमद के साथ किया था। उसने निकाह के वक्त दहेज दिया था। शादी के एक साल बाद ससुराल पक्ष से टीवी, अलमारी की मांग की जाने लगी। पीड़ित पिता ने मांगे पूरी की। इसी बीच शौहर ने बाइक की मांग रख दी। बीवी ने साफ इंकार कर दिया। बीती चार मई को शौहर रईस ने बीवी को घर से निकाल दिया। वह मायके में रहने लगी। छह मई को शौहर का दोबारा फोन आया। जिसमें उसने बाइक लाने के लिये कहा। इंकार करने पर आठ मई को शौहर ने मायके में अपनी बीवी को खत लिखकर तीन तलाक दे दिया।
दहेज और हलाला पर पत्नी का इंकार
खत पढ़ने के बाद पीड़िता घबरा गई। अपनी वैवाहिक जिंदगी को बचाने के लिए वह शौहर के पास पहुंची। गिड़गिड़ाई, मिन्नते की। इसके बाद पति ने नई शर्त रख दी कि वह पहले दहेज में बाइक लेकर आये। फिर बहनोई के साथ हलाला की रस्म अदा करे। तब वह पत्नी को दोबारा अपने साथ रखेगा। पीड़िता के एक बार फिर ऐसा करने से मना कर दिया।
लड़ेगी कानूनी लड़ाई
पीड़िता ने न्याय की गुहार के लिए मुस्लिम समाज के कई लोगो की चौखट पर जाकर अपनी पीढ़ा सुनाई। सभी ने दहेज मांगने पर ऐतराज जताया लेकिन तलाक के बाद हलाला की रस्म को शरियत का कानून बताते हुए पूरा करने को कहा। पीड़िता ने एसएसपी के दरबार में पेश होकर शिकायत की। दोनो प्रदेशों के सीएम को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का कहना है कि अगर उसे न्याय नही मिला तो वह शरियत के इस कानून के खिलाफ कानूनी जंग लड़ने के लिए तैयार हैं। महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने की पीएम मोदी की तीन तलाक के मुददे को उठाने को सही कदम बताया है।