केस एक : बहेड़ी के टांडाछंगा गांव की नरायनों देवी मजदूरी कर बच्चों का भरण पोषण करती हैं। इनके पति लाखन को कई साल पहले शराब पीने की लत पड़ गई। कच्ची शराब ने परिवार को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है।
केस दो : परशुरामपुर की राजोदवी के पति छोटे लाल की छह साल पहले शराब पीने से मौत हो गई। तीन बच्चों को किसी तरह मजदूरी कर पाल रही है।
केस तीन : हरहरपुर के पूरन लाल की आठ साल पहले शराब पीने से मौत हो गई। पांच साल का बेटा है। बेटी अब शादी के लायक हो चुकी है। उसकी पत्नी सुशीला देवी मेहनत मजदूरी करके बच्चों को पालती हैं।
केस चार : टांडाछंगा गांव के शंकर की सात साल पहले शराब पीकर मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद रामवती पर मानों पहाड़ टूट पड़ा। बड़ी मुश्किल से मेहनत मजदूरी कर बच्चों को संभाला।
सेंट्रल जेल के बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश की शराब की लत ने उसके परिवार को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। पत्नी की हत्या करने के बाद उसने खुद तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। इससे चंद्रप्रकाश के बच्चों मयंक और मान्या का भविष्य अधर में लटक गया। स्कूल जाते समय दोनों को नाश्ता बनाकर देने वाली अर्चना जैसी मां कहां मिलेगी। चंद्रप्रकाश अकेले ही नहीं और भी तमाम लोग ऐसे हैं, जो शराब के चक्कर में बर्बाद हो गए हैं।
क्रिकेट के बल्ले से सिर और मुंह पर हमला करके पत्नी अर्चना की हत्या करने के बाद आत्महत्या करने वाला बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश होश में नहीं था। नशे में वह पत्नी पर बल्ले के हमला करता ही गया। बेड पर पत्नी को मरा समझने के बाद भी खुद छत पर चढ़कर छलांग लगा दी। परिवारीजनों ने बताया कि बेटे मयंक ने नम आंखों से माता-पिता की चिताओं को मुखाग्नि देकर हमेशा के लिए विदाई दी। बंदी रक्षक के पैतृक गांव का कोई भी शख्स यह मंजर देखकर अपने आंसू नहीं थाम पाया। चंद्रप्रकाश की तरह शराब जिले में हजारों परिवारों में रोजाना क्लेश की वजह बन रही है। पत्नी-पत्नी में मारपीट की घटनाएं भी होती हैं। थाने तक भी तमाम मसले आते हैं, लेकिन पुलिस पारिवारिक विवाद बताकर मामले को हल्के में लेकर निपटा देती है। शराबियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से हौसले और बढ़ जाते हैं।
नवाबगंज में शराब का बाजार लगता था
नवाबगंज के परोथी गांव में कभी शराब का बाजार लगता था। महिलाएं तक शराब के इस धन्धे में लिप्त थीं। वर्ष 2004 में यहां कच्ची शराब पीने से सुम्मेरलाल दर्जी, ख्यालीराम और नत्थूलाल जाटव की मौत हो गई थीं। मोहम्मद इजराइल की आंखों की रोशनी चली गई थी जो अब तक नहीं लौटी। हालांकि आंखों की रोशनी जाने के बाद उसने शराब छोड़ दी। यहां थोड़े दिन तक इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा लेकिन अब सब कुछ पुराने ढर्रे पर आने लगा है। ईंध जागीर, ज्योरा मकरन्दपुर, बुखारपुर, गुलड़िया, रघुनाथपुर के अलावा भदपुरा के नकटीनरायनपुर, सिठौरा, बहिर जागीर और अबदला आदि गांवों में सस्ती के चक्कर में खुलेआम शराब रूपी जहर को पीते देेखे जा सकते हैं।
रोजाना औसतन 60 हजार लीटर शराब खपत होती है
जिले में रोजाना 60 हजार लीटर से ज्यादा शराब की खपत हो रही है। नत्थूलाल की पत्नी लज्जावती बताती हैं कि जब शराब से पति की मौत हुई थी तो बच्चे छोटे थे। कितनी मुसीबत उठानी पड़ी। इसको बता नहीं सकते। अब दोनों बेटे धर्मवीर और प्रदीप 19 छोटा मोटा धंधा कर परिवार चलाते हैं। चार सौ से ज्यादा गांवों में शराब की भट्टियां धधक रही हैं।
कच्ची शराब के कारोबार वाले मुख्य गांव
सदर : गंगापुर, जाटवुपरा, बभिया, भोजीपुरा, किला, बाकरगंज, नकटिया, स्वालेनगर, सीबीगंज, बिथरी।
आंवला : पैगा, फुलासी, वीरपुरा गौटिया, रहतुइया, आसपुर, रामनगर समेत दर्जन भर से ज्यादा गांव।
विशारतगंज : अखा, ढका, चंजरी, खजुआई, परसिया, कफिया, लुहारी आदि।
भमौरा : दलीपुर, चंपतपुर, भोजपुर, मिलक, गुंसारा, सरातू, अलीगंज में रोहतापुर, कीरतपुर, कुंडरिया, अमरौली, अंतपुर, कैनी समेत खादर के गांव।
सिरौली : अंजनि, रुखाड़ा, शिवपुरी, कतुरोई, ढकुरान, पिपरिया, उपराला के अलावा झालों में कच्ची शराब बनाकर बेची जाती है।
बहेड़ी : बंजरिया, पिपलिया, इटौवा, बुझिया, मकसूदनपुर, भुडिया कालोनी, फरदिया मनकरा,हरहरपुर, गुडवारा, हसनपुर, रतनपुर नौडांडी, मिर्जापुर औरंगाबाद, सैदपुर समेत 173 गांव।
मीरगंज : सेवा ज्वालापुर, लालपुर, जिया नगला, बैरमनगर गौंटिया, नगरिया समेत 18 से ज्यादा गांव।
फरीदपुर/ भुता : फतेहगंज पूर्वी, इनायतपुर, पचौनी, सैदापुर, बाकरगंज, ढकनी रजपुरी, नगरिया कला, सराय गौटिया समेत 50 गांव।
शराब पीने वाले पुलिस कर्मी चिहिन्त होंगे
शराब के चक्कर में सेंट्रल जेल की आवासीय कॉलोनी में पत्नी अर्चना की क्रिकेट के बल्ले के हमला करके हत्या करने के बाद बंदी रक्षक चंद्रप्रकाश के जान देने सेपरिवार के बर्बाद की घटना की चर्चा होती रही। घटना के बाद से पुलिस महकमे के कर्मचारी और अफसर दुखी हैं। उन्होंने इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी है। आईजी विजय प्रकाश ने जोन के सभी जिलों में शराब पीने वाले पुलिस कर्मियों को चिहिन्त कराकर उनकी काउंसलिंग कराने को कहा है। उनका कहना है सभी जिलों की पुलिस लाइंस में नशे के लती पुलिस कर्मियों के सुधार पर काम कराया जाएगा। आईजी ने बताया कि बरेली के डीआईजी शाहजहांपुर, पीलीभीत, बदायूं और बरेली जिले के शराब पीने वाले पुलिस कर्मियों को चिहिन्त कराकर उनकी काउंसलिंग कराएंगे। मुरादाबाद के डीआईजी अपनी रेंज के अमरोहा, रामपुर, संभल, मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के शराब के आदी पुलिस कर्मियों को चिहिन्त कराकर उनकी काउंसलिंग कराएंगे। वर्दी में शराब पीकर सड़क पर पड़े होने की घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती हैं। इससे इनमें भी कमी आएगी। साथ ही पुलिस कर्मियों की आदत में सुधार होने से उनके परिवार भी बर्बाद होने से बच जाएंगे।