फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्राइम ब्रांच तो दागियों का दल है

Sat, 10 Dec 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
विज्ञापन
Then the crime branch team Dagion - फोटो : बरेली, अमर उजाला
विज्ञापन
सुभाषनगर में सूद का काम करने वाले संजय कालिया के साथ घर में शराब पीकर उसी से कमाई का हिसाब मांगने के चक्कर में सिपाही रवींद्र सिंह गोली खा गया। पुलिस ने उसकी तहरीर पर संजय और उसके भाई के खिलाफ जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है और एक महिला समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया है। उधर, मिशन अस्पताल में ऑपरेशन के बाद सिपाही की हालत अब भी नाजुक ही बतायी जा रही है। सिपाही सही बात बताने में हिचकता रहा और इधर पुलिस की वर्दी का दाग बचाने के लिए अफसर भी इस मामले को हल्का करने के प्रयास में हैं।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार की रात करीब ग्यारह बजे क्राइम ब्रांच का सिपाही रवींद्र सिंह सरकारी टाटा सूमो लेकर सुभाषनगर में वाजपेयी स्वीट्स से आगे स्टेट बैंक के पास रहने वाले सूद का काम करने वाले  संजय कालिया के पास गया था। वहां बैठकर दोनों ने शराब पी और बाद में वह संजय से रुपये मांगने लगा। विरोध करने पर दोनों नशे में भिड़ गए। मारपीट के दौरान रवींद्र को पेट में गोली लगी और गुदा के पास से होकर निकल गई। गोली लगने पर वह तड़पकर सड़क पर जा गिरा। रवींद्र ने ही फोन करके अपने साथी योगेश त्यागी को सुभाषनगर बुलाया। योगेश त्यागी दो साथियों को लेकर मौके पर पहुंचा और रवींद्र को सरन अस्पताल ले आए। यहां पहुंचने के बाद भी योगेश त्यागी ने सुभाषनगर पुलिस को घटना की जानकारी नहीं दी। सरन अस्पताल से रवींद्र को मिशन अस्पताल ले जाया गया। पेट में गोली लगने की वजह से डॉक्टरों ने उसे आईसीयू में रखा है। डॉक्टरों ने सिपाही का ऑपरेशन कर दिया है, लेकिन अभी भी सिपाही की हालत नाजुक बनी हुई है। रवींद्र की तहरीर पर सुभाषनगर थाने में संजय कालिया और उसके भाई राम के खिलाफ  जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज करके  पुलिस ने राम, विकास और विकास की पत्नी कुसुम को हिरासत में ले लिया है।  

सिपाही को गोली लगी है। गोली उसके पेट के रास्ते से होकर पेशाब की नली से होकर शौच के रास्ते से बाहर निकल गई है। उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, लेकिन रिकवर होने की उम्मीद है।
विज्ञापन

-अमिताभ द्रोण, पीआरओ, मिशन अस्पताल

क्राइम ब्रांच तो दागियों का दल है
क्राइम ब्रांच की इंवेस्टीगेशन विंग तो दागियों को दल है। टीम के प्रभारी विकास सक्सेना बदायूं के मुुकुल एनकाउंटर के दागी है। इसके बाद भी वह  प्रभारी की कुर्सी पर बने हुए हैं। जैसे ही कोई अफसर उन्हें हटाने की सोचना है। एक फोन आते ही कलम थम जाती है। 
एसआई जगवीर यादव भी मुुकुल एकाउंटर में जेल जा चुके हैं। हालांकि उन्हें लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। यह कहा जाता है कि बिना वजह जगवीर फंस गए। कानूनी पेंच फंसने की वजह से उन्हें भी मुल्जिम बना लिया गया। सुभाषनगर में रवींद्र सिंह नाम के जिस सिपाही को गोली लगी है वह पहले भी काफी बदनाम रहा है। उसने जीआरपी के दरोगा जयपाल सिंह और कथित पत्रकार के साथ मिलकर होटल में लड़की बुलाकर एक लड़के के उसके साथ फोटो खींचकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। इसमें सिपाही असगर अली, धर्मेंद्र कुमार भी शामिल थे। सभी के खिलाफ थाना सुभाषनगर में मुकदमा लिखने के बाद पुलिस ने जेल भेजा था। रवींद्र सिंह को भी जेल जाकर जमानत करानी पड़ी थी। इसी टीम में तैनात एक और सिपाही को लेकर भी तमाम बातें सामने आ रही हैं। फरीदपुर से लेकर शहर के सभी काला कारोबार करने वाले उसी के संपर्क में रहते हैं। किला में नन्हें का जुआघर चलाने में भी उसी की अहम भूमिका है। क्राइम ब्रांच का कोई भी सिपाही ऐसा नहीं है, जो सिफारिश कराकर नहीं आया हो। बताते हैं कि इसके पीछे  करीब एक लाख रुपये महीना ऊपर की महीने की कमाई  है। स्मैक, सट्टा, जुआ कोई भी धंधा करने वाला ऐसा नहीं है जो क्राइम ब्रांच का हिस्सा न पहुंचाता हो। इसके बाद अफसर किसी सिपाही के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।  
 
अफसर भी वर्दी के दाग धोने में लग गए
 कमाई के चक्कर में सिपाही रवींद्र सिंह को गोली लगने के बाद वर्दी पर लगे दाग को अधिकारी धोने में लग गए।  सिपाही की तरफ से बहादुरी की नई कहानी बनाकर संजय कालिया और उसके भाई राम कश्यप के खिलाफ मुकदमा लिखा दिया गया।
बृहस्पतिवार की रात पेट में गोली लगने के बाद सिपाही रवींद्र सिंह और उसके साथियों ने किसी अधिकारी को घटना के बारे में बताने की जरूरत नहीं समझी। प्रभारी निरीक्षक सुभाषनगर अतुल प्रधान को किसी अन्य के माध्यम से सूचना मिली तो सरन अस्पताल पहुंचे। वहां पता लगा कि गोली जिसको लगी है वह क्राइम ब्रांच का सिपाही है। उन्होंने जैसे ही अधिकारियों को बताया, वर्दी पर लगे इस दाग को धोने के प्रयास शुरू कर दिए। क्राइम ब्रांच में पुलिस के अफसरों के मशविरे के बाद सिपाही की तरफ से तहरीर तैयार कराकर मुकदमा लिखाया गया।

यह है सिपाही की तहरीर 
सिपाही रवींद्र सिंह ने मुकदमा दर्ज कराने को दी तहरीर में कहा है कि उसे बृहस्पतिवार की रात 9.45 बजे सुभाषनगर के संजय कालिया के घर कुछ संदिग्ध लोगों के होने की जानकारी मिली। उसने वहां पहुंचकर संजय के भाई राम को पकड़ लिया। इस पर संजय ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। हमला किस चीज से किया, इसका कोई जिक्र नहीं है। गोली मारने का भी तहरीर में जिक्र नहीं किया है। रवींद्र सिंह ने तहरीर में यह भी कहा है जानलेवा हमला होने के बाद वह गंभीर होकर जमीन पर गिर पड़ा और फोन करके अपने दोस्त योगेश त्यागी को बुलाकर इलाज कराने अस्पताल पहुंच गया। 

डीआईजी खुद क्राइम ब्रांच पहुंचे, जांच के आदेश
 सिपाही को गोली मारने के मामले में पकड़ी गई महिला समेत तीनों लोगों से पूछताछ करने के लिए डीआईजी आशुतोष कुमार खुद पुलिस लाइंस स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस में आधा घंटा बैठे रहे। उन्होंने राम उसके भाई विकास कश्यप और विकास की पत्नी कुसुम से पूछताछ की। साथ ही एसपी क्राइम राजेश्वर सिंह को पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए।
डीआईजी को कुसुम ने बताया कि सिपाही को उसने संजय कालिया के साथ बैठे देखा था। इसी बीच पता नहीं दोनों में किस बात को लेकर विवाद हो गया। सिपाही ने अपनी पिस्टल निकाल ली। दोनों में मारपीट होने लगी। इसके बाद वह तो डर की वजह के कमरे में चली गई और कमरा बंद कर दिया। बाद में एक फायर की आवाज भी आई। इससे ज्यादा उन्हें कुछ पता नहीं है। राम का कहना है कि वह तो संजय के पास रहता ही नहीं है। उसका घटना से कोई लेना-देना ही नहीं है। विकास ने बताया कि वह ऑटो रिक्शा चलता है गैस भरवाने के लिए पंप पर गया हुआ था।

इन बिंदुओं पर जांच से सामने आएगा सच
-एसपी क्राइम राजेश्वर सिंह क्राइम ब्रांच के लीडर हैं। उनकी बिना परमीशन के कोई भी सिपाही कहीं सरकारी गाड़ी और पिस्टल लेकर नहीं जा सकता है। सिपाही रवींद्र सिंह ने ऐसा क्यों किया? उनका वहां जाने के पीछे सही मकसद क्या था?
-संजय कालिया से मोबाइल पर कब-कब सिपाही से बात होती रही है, कहीं ऐसा तो नहीं कि सूदखोरी का काम करने वाले संजय से उसका पुराना नाता है। इसका पता लगाने के लिए कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है।
-घटना से पहले कभी सिपाही का संजय कालिया के घर आना-जाना था या नहीं? आना-जाना था तो किसलिए। संजय की आम शोहरत अच्छी नहीं है। उस पर जुआ, सट्टा के अलावा सूदखोरी करने का भी आरोप है।
विज्ञापन

-सरकारी गाड़ी लेकर सिपाही घूम रहा है। इवेस्टिगेशन विंग के प्रभारी और चालक को पता तक नहीं है। इसके लिए तो कहीं न कहीं वह लोग भी जिम्मेदार हैं।
-गोली लगने के बाद सिपाही ने दोस्त को बुलाने के बजाए अपनी टीम के लीडर को क्यों नहीं बताया? 
-बदमाशों की सूचना थी तो सिपाही अकेला बहादुरी दिखाने के लिए सुभाषनगर क्यों पहुंच गया? उसे टीम को साथ लेकर जाना चाहिए था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें