बरेली। थाना इज्जतनगर के मुंशीनगर फेस-दो में युवती की लाश दुपट्टे के सहारे फांसी के फंदे पर लटकी मिली है। कमरे का गेट का ससुराल वाले बंद होना बता रहे हैं। उसे मारकर लटकाया गया या खुद ही फांसी पर लटकने के लिए मजबूर किया गया, इसे लेकर छानबीन की जा रही है। घटना की सूचना पर पहुंचे मृतका के भाई ने पुलिस के सामने ही गुस्से में उसके ससुर से हाथापाई कर दी। पुलिस ने हस्तक्षेप करके उसे रोका। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने को भेज दिया है। मामले में मृतका के पिता की तरफ से पति समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
हाफिजगंज के महीपत गुलड़िया गांव के मुरारी लाल की 23 वर्षीय बेटी अनुराधा की शादी दो साल पहले मुंशीनगर फेस-दो में रहने वाले पेंटर हरीश कुमार के बेेटे पुनीत कुमार से हुई थी। पुनीत कुमार ऑटो एजेंसी में नौकरी करता है। उसकी मां शशिबाला घरों में काम करती है। बुधवार की दोपहर को थानाध्यक्ष को हरीश कुमार ने बताया कि उनकी पुत्रवधू ने फांसी पर लटकर आत्महत्या कर ली है। उनकी छह साल की बेटी घर पर थी। उसने शव फांसी पर लटका देखकर शोर मचाया तो छोटा बेटा वीरेंद्र कुमार उतारकर निजी अस्पताल ले गया था। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वे और पुनीत घर पर नहीं थे। परिवार वालों के आ जाने के बाद पुलिस ने मौके पर जाकर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फील्ड यूनिट की टीम ने भी मौके का मुआयना किया। पुलिस के सामने ही अनुराधा के भाई ने उसके ससुर हरीश कुमार से हाथापाई कर दी। मृतका के भाई ने बताया कि संतान न होने पर उसकी बहन को ताने दिए जाते थे। दहेज के लिए भी उसे काफी दिनों से तंग किया जा रहा है। ससुराल वालों ने उसे मारकर फांसी पर लटकाया है। पुलिस ने मृतका के पिता मुरारी लाल की तहरीर पर पति पुनीत कुमार, ससुर हरीश कुमार, सास शशिबाला और मौसी कुमकुम के खिलाफ दहेज की मांग पूरी न होने पर हत्या करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अनुराधा की मौत की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
ननद के अलावा लटकता किसी ने नहीं देखा
-फील्ड यूनिट तो शव उतरने के बाद मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचने से पहले ही देवर शव को उतारने की बात कह रहा था। जबकि फील्ड यूनिट की रिपोर्ट के मुताबिक जिस पर चढ़कर फांसी लगाने की बात कही जा रही है उस पर धूल लगी थी। इसके अलावा अनुराधा की छह साल की ननद नीरज को छोड़कर किसी ने उसे फांसी पर लटकता नहीं देखा है। कमरे में बंद होकर फांसी लगाने की बात भी किसी के गले नहीं उतर रही है। जिस चटकनी के धक्का देकर तोड़ने की बात कही जा रही है, वह पहले से ही टूटी थी।