धनेटा गांव के होनहार छात्र दुष्यंत दीक्षित उर्फ अनुज का शव दिल्ली में किराए के मकान में फांसी के फंदे से लटका मिला। दिल्ली पुलिस का दावा है कि दुष्यंत ने पारिवारिक कारणों से आत्महत्या की है। पुलिस से सूचना मिलते ही परिवार वाले दिल्ली दौड़ गए। खुशमिजाज दुष्यंत की मौत की खबर पर गांव में किसी को यकीन नहीं हो रहा है। दुष्यंत का बड़ा अफसर बनकर देश की सेवा करने का सपना था। उसकी मां एक एक दिन इसी उम्मीद में बिता रही थी कि अफसर बनकर लौटेगा उसका बेटा लेकिन आई तो उसके मौत की खबर। दुष्यंत धनेटा निवासी सत्यपाल दीक्षित का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर से पूरा गांव सन्न रह गया। पिता इफको आंवला में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। फैक्ट्री के पास ही भमोरा में खुद किराए का कमरा लेकर रहते हैं। मां प्रवेश गांव में घर पर रहती हैं। जेएनयू में शोध छात्र दुष्यंत की पीएचडी का यह दूसरा साल था। आरपी इंटर कॉलेज मीरगंज से हाईस्कूल, इंटर की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास करने के बाद खंडेलवाल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलाजी (केसीएमटी) रिठौरा से बीएससी (बायो) किया था। इन्वर्टिस से एमएससी करने के बाद दिल्ली चला गया था। दोपहर में थाने से फोन पर मनहूस खबर मिलते ही मां-बाप दिल्ली चले गए। पुलिस के मुताबिक, किराए के कमरे की छत के कुंडे में बृहस्पतिवार की सुबह दुष्यंत का शव लटका हुआ मिला। दुष्यंत की मौत की खबर मिलने के बाद से उसकी मां सुधबुध खो बैठी है। उन्हें इतना गहरा सदमा लगा है कि ठीक से बोल तक नहीं पा रही हैं।
पीएचडी पूरी होने पर नौकरी मिलने की उम्मीद थी
कुछ महीनों में दुष्यंत को प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी अच्छे पद पर नौकरी मिलने का भरोसा था। रोहित के अलावा चाची प्रतिज्ञा और गांव के कई हम उम्र युवकों का कहना है कि दुष्यंत बेहद मिलनसार और खुशमिजाज था। मीरगंज और बरेली में भी पढ़ाई के दौरान कभी किसी से उसका झगड़ा नहीं हुआ। होनहार दुष्यंत की आंखों में बड़ा अफसर बनने के सपना था। उसकी खुदकुशी कर लेने की बात किसी के भी गले से नीचे नहीं उतर रही है। वह कहता था कि छोटी नौकरी करके ही बड़ा अफसर बनने का सपना पूरा करना है। जेएनयू में दाखिला लेने के लिए भी उसने दिन-रात मेहनत की थी। खुद ही दिल्ली में रहकर उसने कोचिंग करके अपना खर्चा चलाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी।
मरने से पहले माता-पिता को फोन किया था
बुधवार रात 11 बजे मां और बृहस्पतिवार को तड़के चार बजे पिता से फोन पर दुष्यंत की बात भी हुई है। क्या बात हुई, यह कोई नहीं बता सका। चचेरे भाई रोहित ने बताया कि कई दिन घर पर रहकर 15 दिन पहले ही दुष्यंत गांव से दिल्ली गया था। दुष्यंत की चाची ने बताया कि मन्नत पूरी होने पर माघ पूर्णिमा पर उसकी मां ने उसे पिन्नी खिलाई थी।