अर्द्ध सैन्य बलों की भर्ती में लिखित परीक्षा पास कराने का सौदा दो लाख रुपये में होता था। मास्टरमाइंड अलीगढ़ का जितेंद्र है जिसकी तलाश में अब इंटेलीजेंस जुट गई है। आईटीबीपी में मेडिकल के दौरान पकड़े गए लोकेश कुमार से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। लोकेश ने बताया कि अलीगढ़ के थाना बरला के गाजीपुर गांव का रहने वाला जितेंद्र कुमार बेरोजगार युवकों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर सॉल्वर मुहैया कराता है। इसके एवज में वह एक लड़के से दो लाख रुपये लेता है। आईटीबीपी के अधिकारियों ने आगरा के थाना सिकंदरा के पनवारी गांव निवासी लोकेश को शक के आधार पर पकड़ने के बाद उसके खिलाफ मुकदमा लिखाकर जेल भिजवा दिया।
चार अक्तूबर को आईटीबीपी में भर्ती के लिए होने वाली एसएससी परीक्षा में उसने सॉल्वर को बैठाया था। उसने पुलिस को दिए बयान में यह बात स्वीकार भी की है। पुलिस के पास उसके खिलाफ सुबूत भी हैं। विवेचना में यह बात साफ हो चुकी है कि सॉल्वर की मां का नाम उमा देवी है और लोकेश की मां नाम शांति देवी हैं। लोकेश ने पूछताछ में यह भी खुलासा किया है कि जितेंद्र कुमार नाम के लड़के से उसकी मुलाकात अलीगढ़ में हुई थी। वह उसका दूर का रिश्तेदार भी है। उसी ने उससे एसएसपी परीक्षा दो लाख रुपये में पास कराने का ठेका किया था। इसमें से 50 हजार रुपये एडवांस ले लिए थे। जितेंद्र कुमार ने अपने वादे के मुताबिक उसे परीक्षा में पास भी करा दिया। लोकेश ने यह नहीं बताया कि सॉल्वर कौन था। बृहस्पतिवार को सॉल्वर बैठाकर एसएससी की परीक्षा पास करने वाले तीन लड़के और पकड़े गए। इनमें से नुकुल कुमार का सुदामा इंटर कॉलेज ग्वालियर रोड सुंदरपुरम, आगरा एसएसपी का परीक्षा केंद्र था। उसने भी पास कराने के लिए सॉल्वर बैठाया। हस्तलिपि में डिफरेंस होने की वजह से उसकी चालाकी पकड़ में आ गई। जिला मथुरा के जराका गांव निवासी सचिन और इसी जिले के गोवर्धन गांव के राजकुमार की की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में कई लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। पुलिस सॉल्वर गैंग का पता लगाने में लगी हुई है। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि इस तरह से सेना में सेंधमारी कोई बड़ा गैंग कर रहा है। गैंग के मास्टर माइंड की तलाश करने की कोशिश की जा रही है।
इस तरह विवेचक ने लिखा इम्तहान
हवालात में बंद नुकुल कुमार कुमार बार-बार विवेचना उप निरीक्षक नसीम खां से एक बार लिखवाकर देखने के बाद हस्तलिपि चेक कराने की गुजारिश कर रहा था। प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश कुमार भी उन्हीं के पड़ोस में बैठे थे। प्रभारी निरीक्षक से इजाजत लेकर विवेचक ने नुकुल कुमार से लिखवाकर देखा तो फिर से हस्तलिपि में डिफरेंस आ गया।