दिल्ली के इंद्रपुरी में तो सागर ही नहीं और भी कई टप्पेबाजों के गैंग हैं। मूल रूप से मद्रास के रहने वाले लोगों की इस कॉलोनी में टप्पेबाजी की गुर सिखाने के लिए क्लास लगती है। ट्रेनिंग के बाद नई उम्र के लड़कों को यूपी के शहरों में हाथ साफ करने के लिए भेज दिया जाता है। घर पर काम पर जाने की बात कहकर निकलते हैं। फोन पर परिवार वालों से मद्रासी में भी बात करते हैं। ताकि सर्विलांस से भी पुलिस की पकड़ में न आ पाएं।
सोमवार को कटरा के सराफ की कार से जेवर से भरा बैग निकाल कर अपने साथी सागर कोे सौंपते वक्त पकड़ा गया विकास बेहद शातिर अपराधी है। सराफ के मुकदमा लिखाने के बाद पुलिस ने आरोपी विकास को जेल भेज दिया है। पुलिस विकास को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। हालांकि उसके साथी सागर को पकड़ने के लिए दिल्ली गई टीम ने दो दिन में इंद्रपुरी के टप्पेबाजों के बारे में तमाम जानकारी जुटाई है। पता लगा कि इस कॉलोनी में आपराधिक किस्म के मद्रासी बसे हैं। टप्पेबाजों के कई गैंग हैं। सागर का घर भी पुलिस की टीम ने ट्रेस कर लिया है। घटना के बाद से वह अपने परिवार के साथ घर में ताला लगाकर फरार हो गया है। सीओ तृतीय एएसपी आकाश तोमर ने बताया कि इंद्रपुरी के टप्पेबाजों ने ही किला इलाके में भी दो महीने पहले मलूकपुर चौकी के पास एक व्यक्ति का बैग छीन लिया था। उस समय भी इंद्रपुरी का विजय नाम का टप्पेबाज पकड़ा गया था। इंद्रपुरी में टप्पेबाजों के और भी कई गैंग हैं। यह गैंग बरेली के अलावा यूपी के और भी कई जिलों में टप्पेबाजी कर रहे हैं। विकास को रिमांड पर लेकर दिल्ली उसके साथियों के ठिकानों पर ले जाया जाएगा।
यह है टप्पेबाजों का फंडा
-पुलिस सूत्रों के मुताबिक इंद्रपुरी के टप्पेबाज रेलवे लाइन के किनारे बसे शहरों में गाजियाबाद, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ आदि शहरों को निशाने पर रखते हैं। यहां पहुंचना उनके लिए सबसे आसान है। वारदात के बाद खतरा होने पर भागने में भी उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। ट्रेन से सवार होकर टप्पेबाज जंक्शन पर अपना ठिकाना बना लेते हैं। वारदात करने के बाद भी जंक्शन पर ही सब इकट्ठा होते हैं। वहीं के आगे की रणनीति तय होती है।
मद्रासी में करते हैं बात
ट्रेनों में आने-जाने के दौरान टप्पेबाज मद्रासी में ही बात करते हैं। परिवार वालों ने फोन पर बात भी अपनी भाषा में ही करते हैं। इसलिए सर्विलांस की मदद से भी उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। उनकी भाषा समझने में ही कॉल सुनने वालों को दिक्कत होती है।