बात दस दिन पहले की है। सोनू उसकी पत्नी रूपम अपने घर के आंगन में सोए हुए थे। बीच में 29 दिन पहले घर में आया नन्हा मेहमान मीठी नींद में खोया हुआ था। इसी रात कोई दीवार फांदकर घर में घुसा और उनके कलेजे के टुकड़े को चुपचाप उठा ले गया। तभी से रूपम आंसुओं में डूबी हुई थी और परेशानहाल सोनू उसे तलाश करने की दौड़भाग में जुटा हुआ था। सोनू की तलाश तो किसी मुकाम पर नहीं पहुंच पाई, लेकिन सोमवार को तड़के चोर उनके बच्चे को चौखट पर रख गया। अब दोनों पति-पत्नी बच्चा चुराने वाले को दुआएं दे रहे हैं।
यह दिलचस्प घटना गांव करुआताल में हुई। दस दिन पहले रात को अपना बच्चा चोरी होने की बात रूपम को तब पता चली जब सुबह चार बजे उसकी आंख खुली। उसने सोनू को उठाया। दोनों ने पूरे गांव में घूम-घूमकर अपने जिगर के टुकड़े को ढूंढा लेकिन वह कहीं नहीं मिला। तभी से रूपम और सोनू के दिन बेहद परेशानी में कट रहे थे। रूपम बच्चे की याद में दिन भर रोती रहती थी तो सोनू को बच्चे की तलाश में दौड़भाग के अलावा कोई काम नहीं बचा। खाना-पीना और जीवनयापन के धंधे सब छूट गए।
दर्द की यह दास्तां दस दिन तक खिंची। सोमवार तड़के रूपम ने घर के बाहर किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो दौड़ पड़ी। घर की चौखट पर उसका मासूम एक चादर में लिपटा हुआ वहां पड़ा हुआ था। बच्चे को चुराने वाला ही उसे वहां छोड़ गया था। बच्चे को कलेजे से लगाकर रूपम ने सोनू को जगाया और फिर दोनों ने उस चोर को जी भर के दुआएं दीं जिसे वे अब तक कोसते नहीं थक रहे थे।
पुलिस ने न रिपोर्ट लिखी न कोई मदद की
सोनू दस दिन तक लगातार थाने के चक्कर काटता रहा लेकिन पुलिस ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बजाय रोते-बिलखते दंपति को खुद ही अपना बच्चा खोजने की जिम्मेदारी सौंप दी। कहा कि बच्चा मिल जाए तो हमें भी इत्तला कर देना। पति-पत्नी ने अधिकारियों के भी चक्कर काटे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। सोमवार सुबह बच्चे के घर की चौखट पर मिलने के बाद दोनों फिर थाने पहुंचे और पुलिस को इत्तला दी। पुलिस का कहना है कि बच्चा गांव के ही किसी व्यक्ति ने चुराया था, उसे तलाश किया जा रहा है।