प्रशासन और पुलिस अफसरों की चुप्पी से धार्मिक जुलूस और शोभायात्राओं में हथियारों के प्रदर्शन का सिलसिला बढ़ गया है। सावन में कांवड़ियों की भीड़ के बीच खुलेआम हथियार लहराए गए, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मंगलवार को पुराना शहर से निकले दधिकांधौ के जुलूस में भी खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया गया जबकि इस जुलूस में विवाद की आशंका को लेकर खुफिया विभाग ने अलर्ट जारी किया था।
वर्ष 2012 में जन्माष्टमी के जुलूस में जगतपुर में विवाद हो गया था और फिर उसके बाद दंगा हो गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कर्फ्यू तक लगाना पड़ गया। पिछले साल भी यहां माहौल खराब करने की कोशिश की गई थी। इसी बीच पिछले दिनों बिथरी चैनपुर के गांव खजुरिया-उमरिया में कांवड़ को लेकर माहौल खराब किया गया। प्रशासन की सतर्कता से वहां का विवाद टल गया तो जगतपुर से निकलने वाले जुलूस में विवाद कराने की तैयारी होने लगी। इसको लेकर खुफिया विभाग ने अलर्ट जारी किया। पुलिस ने भी इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दीं और कड़ी सुरक्षा में मंगलवार को जुलूस निकाला गया। मगर इस दौरान जुलूस में खुले हथियार लहराए गए। पुलिस और प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में यह प्रदर्शन खुलेआम होता रहा और सब खामोश रहे।
प्रदर्शन पहले भी होता था, बदल गया स्वरूप
इस जुलूस में हथियारों का प्रदर्शन पहले भी होता रहा है। मगर पहले एक ठेले पर हथियार ले जाए जाते थे और उनका प्रदर्शन होता था। प्रदर्शन के बाद हथियारों को दोबारा ठेले पर रख दिया जाता था। मगर इस जुलूस में ठेला नदारद था और लोग खुलेआम हाथों में तलवार, चाकू आदि लेकर चल रहे थे।
शोभायात्राओं में असलहे लहराना नियम विरुद्ध है। यह जिम्मेदारी शोभायात्रा के आयोजकों की है कि वह ऐसे काम न होने दें। जिस शोभायात्रा में असलहे लहराए गए हैं, उनकी जांच कराकर आयोजकों पर कार्रवाई की जाएगी। वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
जब से यात्रा की शुरुआत हुई है तभी से शस्त्रों का प्रदर्शन किया जाता रहा है। यह हमारी परंपरा है और अधिकारी भी इस परंपरा से पूरी तरह से वाकिफ हैं। - दिनेश कुमार गुप्ता, कमेटी अध्यक्ष