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लौट आऊंगी घर पर दोस्त को बख्श दो

Wed, 01 Jun 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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घर वालों की मुखालफत कर दोस्त के साथ अपनी मर्जी से जाकर शादी करने की बात कहने वाली 21 वर्षीय लड़की को मजहब की दीवार आड़े आने पर बैकफुट पर आना पड़ा।  लड़की ने अदालत में कहा कि वह अपने पिता के साथ जाने को तैयार है, लेकिन उसके दोस्त पर की गई कार्रवाई खत्म की जाए। क्योंकि वह अपनी मर्जी से दोस्त के साथ गई थी, फिर उस पर मेरे अपहरण की कार्रवाई क्यों की गई।
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सुभाषनगर इलाके की 21 वर्षीय लड़की कोतवाली पुलिस को 24 अप्रैल को चौपुला चौराहे पर अपने दोस्त के साथ मिली थी। लड़का दूसरे धर्म का था। इसलिए बवाल की आशंका में पुलिस ने उसको लड़की का अपहरण करने के आरोप में जेल भेज दिया और लड़की को महिला थाने। जबकि लड़की पुलिस से चीख चीख कर कहती रही कि वह अपनी मर्जी से लड़के के साथ आई थी। पुलिस ने लड़की को तेइस दिन तक महिला थाने में रखा। इस दौरान उसका मेडिकल परीक्षण हुआ और फिर उसे कलमबंद बयान के लिए अदालत में पेश किया गया। मुकदमे के विवेचक के अनुसार, लड़की ने अदालत में साफ कहा कि उसका अपहरण 
नहीं किया गया। वह अपनी मर्जी से लड़के के साथ गई थी और उसने उससे शादी भी कर ली और नौ दिन तक बतौर पत्नी उसके साथ रही। लड़की का कहना था कि फिर भी अगर मजहब की दीवार आड़े आने पर उसके परिवार वालों को नीचा देखना पड़ रहा है तो वह दोस्त को छोड़कर अपने पिता के साथ चली जाएगी, लेकिन उसके दोस्त पर की गई कार्रवाई खत्म की जाए। विवेचक ने बताया कि इस पर लड़के पर की गई कार्रवाई खारिज कर दी गई और लड़की अपने पिता के साथ चली गई।  
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महिला थाने में तोड़ा जाता है मनोबल  
प्रेम प्रसंग में दोस्तों के साथ जाने वाली लड़कियों को तलाश कर पुलिस महिला थाने में तब तक रखती है, जब तक अदालत में पेश करने को मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया होती है। इस दौरान महिला थाने में लड़कियां खाने तक को तरसतीं हैं। साथ ही आरोपी पक्ष अपने पक्ष में बयान कराने के लिए लड़कियों पर दबाव बनवाकर उनका मनोबल भी तुड़वाता है। 

लंबी होती है मेडिकल की प्रक्रिया
अदालत में कलमबंद बयान दर्ज कराने को लड़की का मेडिकल परीक्षण कराने का प्रावधान है। मेडिकल में उसकी उम्र तस्दीक के साथ ही उसके साथ कहीं कोई शोषण तो नहीं हुआ इसका पता भी लगवाया जाता है। इन सबकी रिपोर्ट बनने में लंबी प्रक्रिया चलती है। अस्पताल से सप्लीमेंट्री रिपोर्ट मिलने में कई दिन लग जाते हैं। तब तक लड़कियों को महिला थाने में ही कैद की तरह रहना पड़ता है। इस ओर किसी के गौर न करने पर लड़कियां सरकारी तंत्र को कोसती हैं। 
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