नगर निगम में डीजल को लेकर चल रहा खेल नया नहीं है। कर्मचारी बिना किसी डर के तेल की चोरी कर रहे हैं और हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है। तभी तो तेल के खेल में न तो डेली रजिस्टर तैयार किया जा रहा है और न ही कोई रिकार्ड है। शुक्रवार को अमर उजाला के कैमरे ने तेल चोरी को पकड़ा तो सच्चाई सामने आ गई। नगर निगम की कू ड़ा उठाने वाली छोटी गाड़ी गांधी उद्यान के पीछे स्टोर के पास आराम से तेल प्लास्टिक की दो लीटर बोतल में भर रहा था। कर्मचारी ने पूछने पर नाम नहीं बताया। कैमरा देखकर घबरा गया तो अपनी गाड़ी पर बैठा और स्टार्ट करके चलता बना। गाड़ी पर कोई नंबर भी नहीं था। जिस व्यक्ति ने गाड़ी से तेल निकाला था उसने भी अपना कोई परिचय नहीं दिया। उसके पास करीब छह बोतल डीजल था जो उसने एक बैग में रखा था। कैमरा देखते ही साइकिल सवार यह व्यक्ति भी वहां से निकल गया। उसने यह जरूर बताया कि वह यहां कर्मचारियों से तेल खरीदता है। तेल की कीमत बाजार के दाम से दो रुपए कम पर लगाई गई थी।
- निगम में बहुत बड़ा है तेल का खेल
नगर निगम में तीन गैराज और एक स्टोर है। यहां सौ से अधिक गाड़ियां खड़ी होती है। प्रतिमाह एक लाख रुपए से अधिक का डीजल इनमें डाला जाता है। डीजल का चार्ज मुख्य सफाई निरीक्षक और हर स्टोर के लिपिक के पास है। गाड़ियों में डीजल कब डाला गया और गाड़ी कहां- कहां गई इसके लिए कोई लॉग बुक नहीं है। बताया जाता है कि यह आज तक बनाई ही नहीं गई। नगर आयुक्त की ओर से गाड़ियों के साथ लॉग बुक में एंट्री का आदेश भी लागू किया गया लेकिन यह आज तक नहीं हो सका। निगम की गाड़ियों को कौन चला रहा है इसका भी कोई रिकार्ड नहीं। कुछ गाड़ियों में तो नंबर प्लेट तक नहीं है। चार नवंबर 2016 को नगर आयुक्त ने सभी सफाई निरीक्षक को आदेश जारी किया कि डोर टू डोर एजेंसियाें द्वारा नियमित कूड़े का उठान डलावघर से नहीं हो पा रहा है। उन्हाेंने आदेशित किया कि सभी वाहन चालक अपने साथ लॉग बुक रखे। कार्य के बाद पार्षद, सफाई नायक और निरीक्षक से इसे भरवाएं। बिना सत्यापन लॉग बुक वाले वाहनाें को डीजल न देने की बात कही गई थी। लेकिन यह भी लागू नहीं हो पाया।
इतना मिलता है रोज डीजल
तीन पहिया- 5 लीटर
7 जेसीबी- 35-35 लीटर
अन्य वाहन- 15 से 20 लीटर