गेहूं के साथ घुन पिसने की कहावत तो आपने सुनी होगी। पंखियों के गांव अंगूरी टांडा के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। डकैतियों की ताबड़तोड़ वारदातों से बौखलाई पुलिस ने घुमंतू जनजाति के लोगों के इस गांव में दबिश देकर कई छात्र और ऐसे नाबालिगों को भी पकड़ लिया जिनके परिवार का अपराध से कोई लेनादेना नहीं है। थाने की आठ गुणा दस फिट की तंग हवालात में चार दिन से ये यातनाएं भुगत रहे हैं।
हवालात में बंद अमन अंगूरी टांडा के ही जूनियर हाईस्कूल में कक्षा आठ का छात्र है। उसका रिश्तेदार ताजीम भी बंद है। वह लाल फाटक के निजी विद्यालय में दसवीं का छात्र है। बाइस बरस का शामीन बैंडबाजा बजाता है तो सोलह साल का अलीम बैंड की बग्गी चलाता है। उसके माता-पिता की मौत हो चुकी है। परिवार उसी की कमाई से चलता है। सत्रह साल का साहिल तांगा चलाकर परिवार पालता है। उसके पिता तीन साल से लकवे के शिकार हैं। इन सभी का दावा है कि उनका या परिवार का कोई क्राइम रिकार्ड नहीं है। पुलिस भी इस बात को मानती है पर डकैतियों का खुलासा न होने तक उन्हें बैठाए रखना चाहती है।
भाई को छुड़ाने आए मदरसा शिक्षक नफीस
गांव का शिक्षित युवा नफीस शाहजहांपुर जिले में आधुुनिक मदरसा योजना के तहत शिक्षक है। करगैना में उनके नाम से नफीस बैंड संचालित है, जिसने गांव के कई युवाओं को रोजगार दिया है। शुक्रवार को थाने आए नफीस ने अपने भाई अमन और अन्य लोगों को छोड़ने के बारे में इंस्पेक्टर आरएन चौधरी से गुहार की। कहा, इन्हें रात में बेवजह पीटा जाता है। इंस्पेक्टर ने इसे उच्चाधिकारियों के स्तर का मामला बता दिया।
बच्चे छोड़ रोज थाने आती हैं महिलाएं
गांव की महिलाएं अपने बच्चे और जानवर बुजुर्गों के हवाले करके रोज ही खाना और कपड़े लेकर थाने आती हैं। परिवार के सदस्यों के छूटने की आस में दिन भर थाने के बाहर बैठी रहती हैं और शाम को मायूस होकर लौट जाती हैं।
जेल में हैं शातिर
चोरी, लूट आदि वारदातों में लिप्त अंगूरी टांडा के शातिर बदमाश पहले से ही जेल में बंद हैं। दरअसल मंगलवार आधी रात जब पुलिस ने गांव में छापा मारा तो ज्यादातर पुरुष भाग निकले। पुलिस के हाथ छात्र या ऐसे लोग चढ़े जिनका जरायम से कोई वास्ता नहीं है।
अंगूरी टांडा के लोगों को पूछताछ के लिहाज से ही लाया गया है। उनसे कोई सख्ती नहीं की जा रही। जो निर्दोष हैं, उन्हें छोड़ दिया जाएगा।
- रोहित सिंह सजवाण, एसपी सिटी