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पूरे रुहेलखंड में फैला है नकली पेट्रोल वालों का नेटवर्क

Wed, 01 Mar 2017 01:38 AM IST
बरेली
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यह बड़े लोगों का गिरोह पेट्रोलियम पदार्थों के रसायन की केमिस्ट्री से पूरी तरह वाकिफ हैं। नेफ्था आदि पेट्रोलियम पदार्थों में किस तरह केमिकल मिलाकर कौन सा ईंधन तैयार करना है, इसकी भी उन्हें जानकारी है। रिफाइनरी से आने वाली सप्लाई के टैंकर को में नेफ्ता और कैमिकल मिलाकर 20 से 30 रुपये प्रति लीटर के मुनाफे के लिए खेल चल पड़ा। नेफ्था की मिलावट उसका घनत्व पेट्रोल और डीजल के बराबर कर दिया जाता है। देवचरा स्थित केके गुप्ता के कोल्ड स्टोरेज में इसके लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगा रखी है।
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तफ्तीश में लगी टीम से मिली जानकारी के अनुसार नेफ्था से नकली पेट्रोल बनाने वालों का यूपी के कई जिलों में नटवर्क है। इस गैंग के पास करीब 30 टैंकर तो अपने हैं। इसके अलावा 50 और टैंकर के चालकों से गिरोह के लोगों ने सांठगांठ है। ये लोग रिफाइनरी से आने वाले तेल के टैंकरों को ही अपने अड्डों पर बुला लेते हैं। यहां टैंकर से आधा तेल उतारने के बाद उसमें नेफ्था मिलाकर उस पार्टी के पास भेज दिया जाता है, जहां के लिए टैंकर आता है। इस तरह उन्हें नेफ्था की कीमत पेट्रोल के बराबर ही मिल जाती है। सरकारी विभागों में भी यह गैंग इसी तरह पेट्रोल मे नेफ्था से बना तेल मिलाकर भेज देते हैं। इसके लिए उन्होंने कई विभागों के डिपो के फोरमैन को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। प्रति टैंकर के हिसाब से फोरमैन को कमीशन देते हैं। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर भी देवचरा का मिलावटी तेल बिक रहा है। कोल्ड स्टोरेज के मालिक केके गुप्ता और तेल के खेल के मास्टर नितिन कंसल के पार्टनर वीरेंद्र पाल ने पूछताछ में कई पेट्रोल पंपों के नामों का खुलासा किया है, जिन पर वह तेल की सप्लाई करते हैं। वीरेंद्र ने बताया कि टैंकर संख्या यूपी-25 जी-8588 में भरा मिलावटी तेल दातागंज (बदायूं) के सोनू गुप्ता के पंप पर जाना था। मौके पर मिले सभी टैंकर केके गुप्ता के हैं। पुलिस के मुताबिक इन टैंकरों से शहर के कई बड़े पंपों के मिलावटी तेल की सप्लाई होती थी। कंपनी के कई पंप भी नितिन के तेल की सप्लाई लेते थे। शहर की एक कंपनी का पंप तो तीन महीने से मिलावटी तेल बेच रहा है। शाहजहांपुर के कई पेट्रोल पंपों पर भी यहां से मिलावटी पेट्रोल जा रहा था। पश्चिमी यूपी में मुरादाबाद, संभल, रामपुर आदि जिलों में भी इस गैंग का नेटवर्क है। डिपो से सप्लाई लेकर निकलने वाले दूसरे टैंकरों के चालकों को  भी मोटी रकम मिल जाती है। मिलावटखोरों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से पेट्रोलियम पदार्थ का कारोबार करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जाता है कि दो नंबर का कारोबार करने वाले केके गुप्ता ने शिव शक्ति कैमिकल्स के नाम से फर्म बना रखी है। टैंकरों से पेट्रोल उतारकर उसमें मिलाने के लिए बिल पर गुजरात से वह नेफ्था मंगाकर हर महीने करोड़ाें का खेल करते हैं। छापामारी की कार्रवाई से बरेली समेत कई जिलों के बड़े पेट्रोल पंप मालिकों को पसीना छूट रहा है। इस कार्रवाई से कई बड़े घरों के लोगों पर कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है।  


इंजन आयल की दुकान से शुरू हुआ ये खेल
पकड़े जाने के बाद कंसल ने गुप्ता को जोड़ कर बनाया बड़ा नेटवर्क
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
नकली पेट्रोल के खेल के मास्टर माइंड मेरठ के नितिन कंसल की कहानी बड़ी दिलचस्प है। वह वर्ष 2000 में  यहां कोहड़ापीर पर उन्होंने एक पेट्रोल पंप के मालिक की मेहरबानी से इंजल ऑयल ( मोबिल) की दुकान खोलकर छोटा का काम शुरू कर दिया। नंबर दो के तेल के कारोबार के बाद नितिन कंसल मालामाल होते चले गए। एसएसपी आनंद स्वरूप के कार्यकाल में नितिन का खेल पकड़ा भी गया था। नवाबगंज और सीबीगंज में छापामारी के दौरान उनके खिलाफ पुलिस ने मुकदमे लिखा। इसके बाद भी नितिन ने यह काम नहीं छोड़ा। बाद में केके गुप्ता का साथ मिला तो  नंबर दो के इस कारोबार ने और तेजी पकड़ ली।  फतेहगंज पश्चिमी में इसी की कमाई से शहर के तीन बड़े लोगों के साथ मिलकर शिक्षण संस्थान खोलने को करोड़ों की जमीन खरीद ली। उनके पार्टनरों में चर्चित शराब कारोबारी का बेटा भी शामिल है। 
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दिवाली पर कैंसर होने पर केके गुप्ता की हालत बिगड़ी तो उन्होंने फिर से अपने पुराने पार्टनर नितिन को ही याद किया। शाहजहांपुर में निगोही के वीरेंद्र पाल से भी केके गुप्ता का पुराना रिश्ता था। उन्होंने वहां वीरेंद्र के साथ मिलकर मिलावटी तेल का धंधा किया था। केके गुप्ता ने बीमारी की वजह से कागजों में खुद को फर्म का हिस्सा तो रखा, लेकिन अपने बेटे सौरभ गुप्ता को नितिन और वीरेंद्र के साथ लगा दिया।  सौरभ रिठौरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज को देखते हैं। स्नेह स्टोरेज में कई साल से भूमिगत टैंक बने हैं। यहां केके गुप्ता ने कई साल लाइट डीजल ऑयल का काम किया है। यह तेल कैरोसिन में काला तेल मिलाकर तैयार किया जाता था। इस तेल का इस्तेमाल बड़ी फैक्ट्रियों के जनरेटर चलाने में होता है। चार महीने पहले कोल्ड स्टोर में नेफ्था से पेट्रोल बनाने का काम पूरी तरह से नितिन और वीरेंद्र ने अपने हाथों में ले लिया। इससे पहले केके गुप्ता खुद यह काम अकेले ही कर रहे थे। टैंकर वालों को मैनेज करने में वीरेंद्र की भूमिका सबसे ज्यादा है। शाहजहांपुर के बंथरा डिपो के टैंकर चालकों में वीरेंद्र की मजबूत पकड़ है। इसका भी वह अपने नंबर दो के इस धंधे में पूरा लाभ उठाता है। 
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