रबर फैक्टरी कालोनी के तीन क्वार्टरों को मंगलवार रात दो दर्जन से ज्यादा नकाबपोश डकैतों ने निशाना बनाकर जमकर कहर बरपाया। बुजुर्ग, औरतों को बंधक बनाकर पीटा और तीनों घरों से 60 हजार रुपये कैश, कीमती गहनों समेत लाखों रुपये का माल लूट ले गए। मामले में मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दे दी गई है।
वारदात मंगलवार रात लगभग साढ़े बारह बजे की है। मूल रूप से पिपरिया निवासी पेशे से राजमिस्त्री रमेश चंद्र कॉलोनी के ए-7 क्वार्टर में साल भर से परिवार के साथ रह रहे हैं। उनके क्वार्टर में दीवार फांदकर 20-25 वर्ष के नकाबपोश डकैत कैपरी, शर्ट पहने सबसे पहले घुसे। घुसते ही लुटेरों ने रमेश, उसकी पत्नी पूनम और दोनों भाइयों चरन सिंह, डालचंद को तमंचों के बल पर धमकाया और हाथ पीछे बांध दिए। डकैतों ने चारों को मारा-पीटा और पूनम की 500 ग्राम वजन के चांदी की पायलें, खड़ुआ, तीन मोबाइल फोन और 2000 हजार रुपये नगद समेट ले गए। इसी वक्त 10-12 डकैतों ने पड़ोस के क्वार्टर ए-8 पर धावा बोला। यहां 1966 में रबर फैक्टरी के एक प्लांट में मैनेजर की हैसियत से ज्वाइन करने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग गोविंद प्रसाद अग्रवाल उनकी बीमार पत्नी कुसुमलता और 44 वर्षीय बेटी रेखा रहते हैं। डकैतों ने लोहे के सब्बल के प्रहारों से गेट तोड़ डाला। अंदर घुसकर बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। गोविंद प्रसाद की दाहिनी आंख में मोतियाबिंद का हाल ही में आपरेशन हुआ है। पिटाई से आपरेशन वाली आंख में ही गहरी चोट आई है। अलमारी का ताला तोड़कर रेखा के 20 हजार रुपये नगद और लाखों रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात लूट ले गए। बाद में डकैतों ने इसी कालोनी के ए-9 क्वार्टर में भी कहर बरपाया। पड़ोसी गांव रहपुरा जागीर का लालता प्रसाद इस क्वार्टर में रहकर फैक्टरी में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। बीती रात वह ड्यूटी पर गया हुआ था। पत्नी मंजू देवी, सास कमला देवी और मां रानी देवी ही घर में थे। डकैतों ने चीखने की कोशिश पर कमलादेवी के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और रानी देवी को लात-घूसों से जमकर पीटा। रानी देवी ने बताया कि एक डकैत ने जमीन पर उनका हाथ रखवाया और फिल्मी स्टाइल में हाथ पर चढ़कर जूतों से कुचलता रहा। पत्नी मंजू देवी के पेट का हाल ही में आपरेशन हुआ है। नकदी, माल-जेवर छिपाकर रखने का ठिकाना न बताने पर उसके आपरेशन वाले पेट में ही लात-घूसे मारे। डकैत लालता प्रसाद के घर से 20 हजार रुपये नगद और हजारों रुपये कीमत के कपड़े, जेवर लूट ले गए। पुलिस ने घायलों को पीएचसी भेजा। वहां से जिला अस्पताल भिजवा दिया गया है। बुधवार सुबह एसओ अशोक कुमार यादव और थाने के कई दरोगा, सिपाही घंटों पूरी कालोनी का जायजा लेते रहे। सीओ मीरगंज नरेश कुमार ने भी मौका मुआयना किया है। फील्ड यूनिट टीम भी घंटों डकैतों के सुराग तलाशने में जुटी रही।
पुलिस की नाक के नीचे बड़ी वारदात कर गए डकैत
-रबर फैक्टरी कालोनी, जहां के तीन क्वार्टरों को बीती रात डकैतों ने निशाना बनाकर जमकर कहर बरपाया। वहां से थाना मुश्किल से एक किमी की दूरी पर है। हाईवे पर राधाकृष्ण मंदिर के पास पुलिस पिकेट बमुश्किल 200 मीटर दूर है। सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी भी पास में ही रहती है। इतना ही नहीं, 18 से ज्यादा दरोगा, सिपाही कालोनी के क्वार्टरों में अकेले या परिवारों के साथ वर्षों से रह रहे हैं। 28 मई को इंचार्ज समेत पुराने सभी सिक्योरिटी गार्ड भी बदले हैं।
बांधने का स्टाइल महीने भर पहले हुई लूट जैसा
-कालोनी के घरों में घुसकर हाथों को पीछे की तरफ बांधने का डकैतों का स्टाइल महीने भर पहले रहपुरा-मीरापुर रोड पर चार राहगीरों से हुई लूटपाट जैसा ही है। यह भी मुमकिन है कि डकैतों के एक-दो साथी उस लूट में भी शामिल रहे हों।