राशन माफियाओं पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल नेटवर्क शुरू कराया, इसके तहत दुकानों पर पीओएस मशीनें लगाई गईं लेकिन माफियाओं ने इसमें भी सेंध लगा दी। बरेली समेत 43 जिलोें मेें सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर करोड़ों रुपयों का राशन हजम कर लिया। खुलासा होने के बाद से खाद्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उपायुक्त खाद्य और स्थानीय प्रशासन ने इस धंधे में लिप्त कोटेदारों का चिह्नीकरण शुरू कर दिया है। इसके लिए टीमें भी गठित कर दी गई हैं। माना जा रहा है कि इस घोटाले से सरकार की काफी किरकिरी हुई है, इसलिए फर्जीवाड़े में शामिल लोगोें पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत एनआईसी के सॉफ्टवेयर और आधार लिंक प्रणाली प्रदेश भर में लागू की थी। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में दुकानों पर मशीनें लगाई गईं, इस योजना के तहत राशन कार्ड धारक अथवा उनके परिवार के सदस्य को मशीन पर अंगूठा लगाकर ही राशन और केरोसिन दिया जाता है। अभी ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनें नहीं लगी हैं। खाद्य विभाग ने यूपी में ओएसिस, लिंकवैन और विजनटेक कंपनियों को सपा सरकार में ठेका दिया गया। ये एजेंसियां प्रभावशाली लोग संचालित कर रहे हैं। इन लोगों ने गरीबों का राशन हड़पने के लिए सॉफ्टवेयर में ऐसी व्यवस्था कर दी कि जितनी बार चाहो उतनी बार अनाज या केरोसिन ले लो। इस साजिश में एजेंसी के लोगों ने कोटेदारों का सहारा लिया और गरीबों के हिस्से का राशन हड़पना शुरू कर दिया। सॉफ्टवेयर के जरिये अनाज और केरोसिन के वितरण का ब्योरा हर दिन जारी होता है। मुख्यालय स्तर पर अफसरों ने इसका अध्ययन किया तो पाया कि एक राशन कार्ड पर तीन सौ बार तक अनाज और केरोसिन वितरित हुआ है, जबकि नियमानुसार कार्ड धारक दो बार अपने हिस्से का अनाज निर्धारित मात्रा में खरीद सकता है, लेकिन माफियाओं ने सॉफ्टवेयर में सेंध लगाकर कर गरीबोें का सस्ता अनाज खुद हजम कर लिया। मामले का खुलासा होते ही आनन फानन में खाद्य आयुक्त ने बरेली समेत 43 जिलों में हुए फर्जीवाड़े की जांच का फैसला किया है।
धरपकड़ के लिए बनीं टीमें
उपायुक्त खाद्य राजन गोयल ने शुक्रवार दोपहर मंडलीय बैठक बुलाई, चारों जिलापूर्ति अधिकारियों से कहा कि वे अपने जनपदों में मशीनों द्वारा वितरित हो रहे खाद्यान्न व केरोसिन का परीक्षण कराएं। डीएसओ बरेली सीमा त्रिपाठी ने बैठक में बताया कि जिले में 12 दुकानें चिह्नित हुई हैं जहां फर्जीवाड़ा होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इन दुकानदारों को सूचीबद्ध करने और वितरण व्यवस्था का परीक्षण करने के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।