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बिना तफ्तीश के पैक कर दिया रंजीत हत्याकांड

Fri, 22 Sep 2017 01:22 AM IST
बरेली
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ऐसा अब कम ही होता है कि हत्या या डकैती जैसी वारदात में पुलिस अपराधियों को उन हालात में भी ढूंढ निकाले जब किसी की नामजदगी न की गई हो। पुलिस की तफ्तीश का हाल इतना बुरा है कि शाही थाना क्षेत्र में पशु चोरी के दौरान मार दिए गए किसान रंजीत सिंह के हत्यारों की छह महीने बाद भी पहचान नहीं हो पाई है। हालांकि इस बीच चार विवेचक बदल चुके हैं।
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बिहारीपुर निवासी रंजीत सिंह 26 मार्च की रात अपनी पशुशाला में सो रहे थे। उनके दोनों बेटे मजदूरी पर लकड़ी काटने भुता गए हुए थे। रात में पशु चोरी की कोशिश हुई। रंजीत ने विरोध किया तो चोरों ने उनके सीने में गोली मार दी। गोली चलने पर भीड़ इकट्ठी हुई तो चोर तो पशु छोड़कर भाग निकले लेकिन रंजीत की मौत हो गई। उनके बेटे ने इस मामले में अज्ञात पशु चोरों के खिलाफ रिपोर्ट कराई थी। मामले की विवेचना की शुरुआत तत्कालीन एसओ अनिल सिरोही ने की थी जो दस दिन बाद ही ट्रांसफर हो गए। इसके बाद एसओ धर्मेंद्र गुप्ता और बच्चू सिंह ने तफ्तीश की। अब दस दिन पहले एसओ योगेश यादव को विवेचना मिली है। चारों में से कोई भी एसओ विवेचना में एक भी कदम आगे नहीं बढ़ सका। 

दुश्मनी मान बैठे थे पशु चोर
रंजीत काफी हिम्मती थे। हत्या की घटना से एक महीने पहले चोर गांव के ही एक व्यक्ति के पशु डीसीएम में चढ़ा रहे थे। रंजीत शोर मचाकर पत्थर फेंकने लगे तो उन्हें पशु छोड़कर भागना पड़ा। तब भी रंजीत उनकी गोली से बाल-बाल बचे थे। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसी घटना से पशु चोर उनसे दुश्मनी मान बैठे थे। 
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बेटों की मेहनत पर भी पुलिस ने पानी फेरा
रंजीत के बेटे महेश का कहना है कि इलाके में पशु चोरी की घटनाएं अरसे से हो रही हैं। हमने जानकारी करके कुछ पशु चोरों के नाम भी पुलिस को बताए पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस संदिग्धों को पकड़ती तो केस खुल जाता। 

वर्जन
मुझे हाल ही में यह विवेचना मिली है। पिछली जांच में आरोपियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। क्षेत्र के पशु चोरों की गिरफ्तारी करके खुलासे का प्रयास करेंगे। - योगेश यादव, एसओ शाही 
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