रजपुरा गांव के देवी मंदिर से दो गांवों के कांवड़ियों ने नये रास्ते से जाने की जिद की तो पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। सूचना पर पहुंचे एसडीएम व सीओ ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। समझौते के मुताबिक ही निकलने की बात कही पर वे नहीं मानें। कांवरियों का आरोप था कि एक साल पहले हुआ समझौता मुकदमा दर्ज करने की धमकी देकर दबाव में कराया गया था। वहीं, अफसर समझौते के मुताबिक ही रवाना होने को समझाते रहे। बात न बनने पर सीओ अपने साथियों के साथ कांवड़ियों के बीच समझाने गए पर बात बनने के बजाय माहौल गरमा गया। धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि, कई घंटों की मशक्कत के बाद नरायन नगला के कावड़िये तो मान गए पर रजपुरा के कावड़िये मंदिर के सामने ही बैठ गए। पुलिस-प्रशासन उन्हें मनाने में जुटा रहा। वहीं डीएम ने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि नई परंपरा नहीं पड़नी चाहिए। कावड़ियों को मनाकर गंगा जल लेने भेजा जाए।
रजपुरा गांव के देवी के मंदिर से शुक्रवार को नरायन नगला व रजपुरा गांव के कांवड़ियों को जल लेने के लिए रवाना होना था। गांव में बीते तीन साल से कांवड़ यात्रा को लेकर तनाव चल रहा है। लिहाजा दो सिपाही व एक दरोगा को सुबह ही तैनात कर दिया गया। कावड़िये ठीक तीन बजे कांवर लेकर निकल पड़े। इस बार वे मंदिर के सामने से जाने वाले रूट मैप के रास्ते को छोड़कर नये रास्ते से जाने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस और कांवड़ियों में तनातनी हो गई। दरोगा प्रमोद चौहान ने जानकारी इंस्पेक्टर अमरनाथ वर्मा को दी। इंस्पेक्टर एसडीएम ममता मालवीय व सीओ जोगेंद्र लाल के साथ फोर्स लेकर गांव पहुंचे। प्रशासन ने अपराह्न तीन बजे से 7 बजे तक उन्हें मनाने का प्रयास किया। लेकिन धीरे-धीरे तनाव बढता चला गया। इधर, सीओ ने भोजीपुरा, शेरगढ़, शीशगढ़ और देवरनियां थानों से फोर्स को बुला लिया गया। इसके बाद एक सेक्शन पीएसी भी बुला ली गई।
इधर, एसओ देवरनियां विमल कुमार, इंस्पेक्टर बहेड़ी, सीओ जोगेंद्र लाल ने कांवड़ियों के बीच जाकर उन्हें मनाने का प्रयास किया तो माहौल और गर्म हो गया। धक्का-मुक्की भी शुरू हो गई। भनक लगने पर गांव के मुस्लिम समाज के लोगों ने भी नये रास्ते से निकलने पर विरोध जताने की बात कह दी। माहौल गरमाते देख एसडीएम ममता मालवीय ने नरायननगला गांव के नरायन दास व देवी दास को बीच में डालकर वार्ता की और उन्हें हरिद्वार जाने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद नरायननगला के लोग रवाना हो गए। इसके बाद रजपुरा गांव के लोगों से बातचीत शुरू हुई तो नोकझोंक शुरू हो गई। गांव के पुरुष और महिलाएं भी कांवड़ियों के पक्ष में आ गए। एसडीएम की महिलाओं से कई बार नोकझोंक हुई। करीब पांच घंटे की मशक्कत का कोई नतीजा नही निकला। कांवड़िये रात में मंदिर के सामने रास्ते पर बैठ गए। देर रात तक अफसर उन्हें मनाने में लगे रहे।
ग्रामीण बोले, धमकाकर कराया था समझौता
राजपुरा के लोगों का आरोप है कि एक साल पहले जो लिखित समझौता हुआ था वह पुलिस ने दबाव बनाकर करा लिया था। वे राजी नहीं थे पर मुकदमे की धमकी पर उन्हें चुप रहना पड़ा। प्रशासन गांव के कावड़ियों को नये रास्ते से नहीं जाने देगा तो वे कांवर लेकर नहीं जाएंगे।
वर्जन
जो समझौता पहले लिखित में हो चुका है, उसका पालन करना चाहिए। कांवड़िये मान नहीं रहे हैं। उम्मीद है कुछ हल जरूर निकलेगा। जब तक ये लोग नही मानेंगे, सभी अधिकारी गांव में ही कैंप करेंगे। - ममता मालवीय, एसडीएम, बहेड़ी
वर्जन
तय रास्ते से ही कावड़ियों को गुजरने दिया जाएगा। अभी शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत कर रहे हैं। नये रास्ते से किसी भी कीमत पर नहीं गुजरने देंगे। -जोगेंद्र लाल, सीओ, बहेड़ी।