बरेली। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा हत्याकांड में हिरासत में लिए गए ठेकेदार असलम ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसकी फर्म से हुए दस लाख के घपले की प्रधान वैज्ञानिक ने जांच कराकर मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद आईवीआरआई के डायरेक्टर एमसी शर्मा को हटाया गया था और अकाउंट अफसर गिरीश चंद पंत निलंबित हुए थे।
इज्जतनगर एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि हत्याकांड के खुलासे के लिए गहन छानबीन की जा रही है। प्रधान वैज्ञानिक की किसी महिला से नजदीकियों के अलावा आईवीआरआई में हुए घपले की लाइन पर भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान पता चला कि ठेकेदार असलम की अपंजीकृत फर्म से वर्ष 2013 में दस लाख का घपला हुआ था। बगैर खरीदारी किए ही बिल पास कर लिए गए थे, जिसकी जांच प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा ने कराई थी और मुकदमा भी लिखाया था। इसमें आईवीआरआई के डायरेक्टर रहे महेश चंद्र शर्मा को हटा दिया गया था और अकाउंट अफसर गिरीश चंद्र पंत को निलंबित किया गया था। एसओ ने बताया कि यह बात असलम ने पूछताछ में स्वीकार भी की है। एसओ ने बताया कि जांच जारी है, जिस तरह के तथ्य मिल रहे हैं। उन्हीं को आधार बनाकर जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।
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इस सामान खरीद में हुई थी घपलेबाजी
ठेकेदार असलम की फर्म आईवीआरआई में रजिस्टर्ड नहीं थी। उसने सिर्फ अपनी एजेंसी के नाम पर पैड छपवा लिए थे और उसी पर संस्थान के लिए फर्नीचर, एसी, सिक्योरिटी आदि का खर्च बनाकर बिल प्रेषित किए थे। इसकी जांच प्रधान वैज्ञानिक ने कराई तो घपले का खुलासा हुआ था।