गरीबों का मुफ्त इलाज करने का दावा करने वाला स्वास्थ्य महकमा जान लेने पर तुला है। अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही से 12 से ज्यादा महिलाएं बीमार हो गई हैं। उन्हें कैंप में एक्सपायरी दवा दे दी गई। इसके साइड इफेक्ट सामने आए तो एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले को दबाया जा रहा है।
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और विद्या आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हास्पिटल की ओर से मातृत्व सप्ताह के तहत उचसिया गांव में सात फरवरी को मेडिकल कैंप लगा था। इसमें झादा, उचसिया, कुठला, हरेला रम्पुरा कमन गांव की दर्जनों महिलाएं स्वास्थ्य जांच को पहुंची थी। पीएचसी प्रभारी डॉ. संजीव दिवाकर ने खुद महिलाओं में खून की जांच आदि की थी। एएनएम प्रियंका राय ने गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां और विटामिन बी कांप्लेक्स सीरप दिया था। दवा खाने के तीन दिन बाद ही कई महिलाओं को आंखों में धुंधलापन, शरीर में सूजन, छाले पड़ने, पैरों में सुन्नपन और पेट में जलन की शिकायत सामने आई। एक के बाद एक घर में महिलाओं के बीमार पड़ने पर कई झोला छाप के पास भी गईं। तब पता चला कि विटामिन सीरप एक्सपायरी है। इसकी एक्सपाइयरी डेट 11 नवंबर 2015 छपी थी। मंगलवार को कुछ लोग शिकायत लेकर पीएचसी प्रभारी के पास भी गए मगर उनकी नहीं सुनी गई। ग्रामीणों ने बताया कि सुखदेई, शकुंतला, सत्यवती, मुन्नी देवी, जानकी देवी, कन्यावती, वंदना देवी, पूजा, विद्या, रामरती, अमृता देवी के अलावा वौरे और बाबू राम भी बीमार हुए हैं। करीब 20 से 25 महिलाआें को दवा बांटी गई है।
कोट
हमने सिर्फ आयरन की गोलियां और विटामिन सीरप बांटी थी। इनसे रियेक्शन होने का सवाल ही नहीं है। हालांकि सभी दवाइयां सीएमओ ऑफिस से मिली थीं। हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई। हमारी कोई दवा एक्सपायरी नहीं है।
-डॉ. संजीव दिवाकर, प्रभारी स्वास्थ्य केंद्र