परिवार की एक महिला से अवैध संबंधों के चलते पत्नी की हत्या कर अप्सरा नदी में लाश फेंकने वाले मोहन लाल को चार दिन से थाने में बैठा रखा है। जुर्म कबूलने के बाद भी उसे अब तक जेल नहीं भेजा गया है जबकि ससुराल के आठ लोग दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद घर छोड़कर चले गए हैं। उधर, डेढ़ साल के बेटे के बारे में न मोहन लाल अब मुंह खोल रहा है न ही पुलिस उसकी बरामदगी की कोशिश कर रही है।
क्योलड़िया के ज्योति जागीर गांव के प्रमोद कुमार की बेटी की शादी अधकटा रब्वानी बेगम के होरी लाल के बेटे मोहन लाल से तीन साल पहले हुई थी। उसका डेढ़ का बेटा गौरव भी है। दोनों में कई दिनों से अनबन चल रही थी। कई बार मारपीट भी हुई थी। पांच अक्तूबर को मोहनलाल पूनम और डेढ़ साल के बेटे गौरव को मायके पहुंचाने की बात कहकर घर से निकला था लेकिन ससुराल नहीं पहुंचा। पिता ने पुलिस में शिकायत की लेकिन किसी ने नहीं सुनी। रविवार शाम करीब पांच बजे नवाबगंज पुलिस को अप्सरा नदी से पूनम का शव बरामद कर लिया। सोमवार को पुलिस ने पूनम के पिता की तहरीर पर मोहन लाल, जेठ हीरालाल, जेठानी धर्म देवी, भतीजी हिमंचला, ससुर होरी लाल, ताऊ बाबूराम और गांव के ही कुलदीप के विरुद्ध दहेज हत्या का मामला दर्ज किया।
मोहन लाल ने पुलिस को बताया था कि वह अपने बेटे गौरव को हरिद्वार में एक अजनबी बाबा को सौंप आया था। हालांकि पुलिस और पूनम के मायके वाले उसकी भी हत्या की आशंका जता रहे हैं। लेकिन पुलिस चार दिन से मोहन लाल को हिरासत में बैठाने के बाद भी सच नहीं उगला पा रही है न ही उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सीओ का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।