थाना प्रेमनगर इलाके में राजेंद्र नगर बिजलीघर के सामने सरेराह लड़कियों से छेड़छाड़ करने वाले नीली बत्ती में सवार युवकों को पुलिस ने माफ करा लिया। आरोपी बड़े घर के बेटे थे, इसलिए पुलिस बिचौलिया की भूमिका में नजर आई। मामला निपटाने के लिए लड़की के नाम से प्रभारी निरीक्षक को संबोधित प्रार्थना पत्र भी लिया गया। जिसमें लड़की छेड़छाड़ की घटना को ही सिरे से खारिज कर रही है। जबकि घटना के तमाम चश्मदीद गवाह हैं। पुलिस ने अवैध रूप से नीली बत्ती लगाने के आरोप में कार को सीज कर दिया है।
रविवार की शाम को राजेंद्र नगर बिजलीघर के पास नीली बत्ती में सवार चार युवकों ने सरेराह तीन लड़कियों से छेड़छाड़ कर दी थी। शोर शराबा होने पर बिजलीघर के कई लोग बाहर निकल आए थे। फरीदपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एसडी वर्मा इस घटना के चश्मदीद गवाह हैं। उन्होंने ही पूरी घटना की जानकारी दी, लेकिन सोमवार की सुबह यह मामला सुर्खियों में आया तो अफसरों ने पूछताछ शुरू कर दी। इससे बाद प्रेमनगर पुलिस ने सक्रिय होकर पूरे मामले को निपटाने के लिए प्लानिंग कर ली। एक लड़की के नाम से प्रभारी निरीक्षक प्रेमनगर के नाम तहरीर लेकर उसमें पूरी घटना को ही झूठी साबित करने की कोशिश की गई। उसमें लड़की की तरफ से कहा गया कि छेड़छाड़ की घटना ही नहीं हुई है। लड़की के प्रार्थना पत्र में पिता का नाम तो है, लेकिन उसका पता नहीं लिखा है। इसलिए पुलिस को दिए पत्र पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह भी है कि तीन लड़कियां साथ थीं तो एक कैसे घटना को झूठा बता सकती है। पुलिस की कहानी की पोल को बिजली कर्मचारी महेश गंगवार ही खोल रहे हैं। उनका कहना है कि दरोगा जी मेरे पास आए थे। दरोगा का कहना था कि लड़की ने लिखकर दे दिया है कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई है। आप भी लिखकर दे दो, कुछ नहीं हुआ है। उधर, फरीदपुर के अधिवक्ता एसडी आर्य ने बताया कि उनकी इस मामले में प्रेमनगर पुलिस से बात हुई थी। पुलिस उन पर भी दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
लड़की से उनकी बात हुई है। वह कार से स्कूटी के टकराने की बात तो कह रही है, लेकिन छेड़छाड़ की बात से इनकार कर रही है। उसका कहना है कि उनकी कार में सवार लड़कों से नोंकझोंक हो गई थी। कार रिटायर सहायक रजिस्ट्रार की बताई जा रही है। उस पर अवैध रूप से नीली बत्ती लगी थी। इसलिए कार को सीज करा दिया है- सिद्धार्थ वर्मा, सीओ सिटी प्रथम