फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीलीभीत बाईपास रोड के गड्ढों ने ले ली असिस्टेंट प्रोफेसर की जान

Sun, 28 Aug 2016 01:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत बाईपास रोड पर बने गड्ढों ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर नवीन कुमार चौबे की जान ले ली। वह शनिवार की शाम बाइक पर अपने घर से निकले थे। हादसा पीलीभीत बाईपास रोड पर तुलसी नगर के सामने हुआ। 
विज्ञापन

बारादरी इलाके की सिंधुनगर कालोनी में रहने वाले 38 वर्षीय नवीन कुमार दुबे रुहेलखंड विश्वविद्यालय के विधि विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। परिवारीजनों के मुताबिक शनिवार शाम करीब सात बजे नवीन बाइक पर घर से निकले थे। रात करीब आठ बजे पीलीभीत बाईपास रोड पर तुलसीनगर के सामने उनकी बाइक में एक ट्रक ने टक्कर मार दी, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गड्ढे में पहिया चले जाने से प्रोफेसर की बाइक असंतुलित हो गई। तभी उनकी बाइक में तेजी से आए एक ट्रक ने टक्कर मार दी। वह हेलमेट भी नहीं लगाए थे। उन्हें घायल पड़ा देख मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर चीता मोबाइल के सिपाही पहुंच गए। इस बीच वहां पहुंची प्राइवेट एंबुलेंस में घायल नवीन को पड़ोस के एक निजी हास्पिटल ले जाया गया। वहां से उन्हें गांधी उद्यान के पास एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। एंबुलेंस ड्राइवर राजेंद्र रात करीब 10.30 बजे घायल नवीन को जिला अस्पताल ले गया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
 उधर, रात करीब साढ़े आठ बजे तक वह अपने घर नहीं लौटे तो पत्नी शैलजा परेशान होने लगीं। उन्होंने फोन किया तो नवीन का मोबाइल बंद था। शैलजा ने फोन करके अपने पिता गुलाबनगर निवासी अजय कुमार को बताया। वे नवीन को तलाशते हुए विश्वविद्यालय की तरफ गए तो किसी का हादसा होने की जानकारी हुई। इधर-उधर दो अस्पतालों में देखने के बाद जिला अस्पताल पहुंचे तो घर वालों ने शव की शिनाख्त की। शैलजा कैंट इलाके के भरतौल गांव स्थित सरकारी विद्यालय में टीचर हैं।
विज्ञापन

एंबुलेंस ड्राइवर देरी न करता तो बस सकते थे प्रोफेसर
जिले भर में जगह-जगह थाने, चौकी में निजी एंबुलेंस खड़ी रहती हैं। हादसा होने का पता लगने पर एंबुलेंस चालक खुद ही मौके पर पहुंचकर घायल को उठा ले जाते हैं। निजी एंबुलेंस चालक घायलों को वहीं ले जाते हैं जहां उन्हें मोटा कमीशन मिलता है। इस बीच अगर मरीज की मौत हो गई तो शव जिला अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। घर वालों के मुताबिक कमीशन के चक्कर में एंबुलेंस चालक घायल नवीन को इधर-उधर घुमाता रहा। जिला अस्पताल पहुंचा तो भर्ती कराने के बजाय करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस में डाले रखा। इस बीच तलाशते हुए परिवार वाले जिला अस्पताल पहुंच गए। कहीं तब जाकर घायल को एंबुलेंस से नीचे उतारा गया। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नवीन को उतारने के बाद चालक एंबुलेंस अस्पताल में छोड़कर भाग गया।
नहीं मिला मोबाइल, पर्स
परिवार वालों के मुताबिक हादसे के बाद नवीन के मोबाइल, पर्स और एटीएम कार्ड का पता नहीं चला। आशंका है कि पर्स और अन्य सामान एंबुलेंस चालक ने निकाल लिया होगा।   
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें